'कड़े क़दम नहीं तो समग्र वार्ता नहीं'

'कड़े क़दम नहीं तो समग्र वार्ता नहीं'

भारत ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान जब तक आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़े क़दम नहीं उठाता तब तक समग्र बातचीत की प्रक्रिया पूरी तरह शुरु नहीं की जा सकती है.

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की पाकिस्तान यात्रा से पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी की बैठक में पाकिस्तान के साथ संबंधों के तौर तरीकों पर चर्चा हुई.

सूत्रों के अनुसार बैठक में इस पर आम सहमति थी कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़े क़दम नहीं उठाता तक तक समग्र वार्ता की प्रक्रिया को पूरी तरह शुरु नहीं किया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर को मुंबई पर हुए हमले के बाद से समग्र वार्ता की प्रक्रिया रोक दी गई है.

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता हफ़ीज़ चाचड़ ने जानकारी दी है कि विदेश मंत्री एसएम कृष्णा तीन दिवसीय यात्रा के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के मुद्दे पर बातचीत करेंगे और कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे.

दोनों विदेश मंत्री बातचीत के बाद संयुक्त रुप से मीडिया से भी बातचीत करेंगे.

कृष्णा अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी से भी मिलेंगे.

इससे पहले 24 जून को भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की इस्लामाबाद में बैठक हुई थी जिसमें दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली मुलाक़ात का एजेंडा तय किया गया था.

भूटान के शहर थिम्पू में मार्च के अंत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने सार्क शिखर सम्मेलन के अवसर पर मुलाक़ात की थी और बातचीत की प्रक्रिया जारी रखने पर सहमति जताई थी.

नीयत साफ़ होनी ज़रुरी

जाने-माने विश्लेषक प्रोफेसर शमीम अख़तर कहते हैं, “वार्ताएँ सफल हों या न हों यह बात बड़ी नहीं है. महत्वपूर्ण बात यह है कि वार्ताएं जारी रहनी चाहिए.जहाँ तक समस्या का संबंध है तो ये समस्याएं जीवन का हिस्सा होती हैं. आज कश्मीर समस्या है तो कल कोई और होगी.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर वार्ताएँ होती रहें और खुले दिल के साथ बात होती रहे तो कोई न कोई रास्ता निकल ही आता है और मैं समझता हूँ कि इससे हमें कोई ज़्यादा आशा नहीं रखनी चाहिए.”

प्रोफीसर शमीम अख़तर ने बताया, “हम तो कहते हैं कि बड़ा सौभाग्य है कि भारत के विदेश मंत्री पाकिस्तान आ रहे हैं क्योंकि वो मुंबई की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को पीछे छोड़ कर आगे बढ़ना चाहते हैं.”

उनके अनुसार इस बैठक में आतंकवाद का मुद्दा छाया रहेगा और पाकिस्तान सरकार को चाहिए कि वह उन तत्वों के ख़िलाफ कार्रवाई करे जो भारत में हमले करते हैं जिस से दोनों देशों के बीच शांति भंग हो जाती है.

उन्होंने कहा, “मैं समझता हूँ कि वर्तमान सरकार उन तत्वों को रोकना चाहती है जो भारत में चरमपंथी कार्रवाईयाँ करते हैं.”

ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने अपनी चीन यात्रा के दौरान कहा था कि इस क्षेत्र कुछ ऐसे तत्व हैं जिन्हों ने मुंबई पर हमला किया और दोनों देशों के बीच शांति को भंग कर दिया.

उन्होंने चीन के सरकारी टीवी चैनल को दिए गए अपने साक्षात्कार में आशा व्यक्त की थी कि दुनिया का सब से बड़ा लोकतंत्र इस क्षेत्र की शांति के लिए बहतर उपाय लेगा.

एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती चाहता है और भारत उस का सब से बड़ा पड़ोसी है जिस की पृष्ठभूमि एक जैसी है.

राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के इस इंटरव्यू पर बात करते हुए प्रोफेसर शमीम अख़तर ने कहा, “ज़रदारी भारत के साथ शांति स्थापित करने के मुद्दे पर गंभीर दिखते हैं. देखिए असल बात होती है नीयत और इरादे की.”

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान की सरकार भले ही कुछ न कर सके इसलिए कि उस के हाथ बंधे हुए हैं लेकिन उस की नीयत साफ है.”

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने मार्च के अंत में सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भूटान में मुलाक़ात की थी और विश्वास बहाली पर सहमति जताई थी.

बाद में भूटान से लौटते ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संपर्क की बहाली की दिशा में आशा से बढ़ कर प्रगति हुई थी.

भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की यह बैठक इस मुलाक़ात की एक कड़ी है और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली पर मुख्य रुप से बात होगी.

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