तीन साल में 7 बार बढ़े दूध के दाम
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया, "जनवरी, 2007 से मार्च, 2010 के बीच दूध की कीमतें सात बार बढ़ी हैं। बीते एक साल के दौरान दूध के मूल्य में 17 रुपये से 22 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई। दूध की कीमतों में हर साल औसतन 21.12 फीसदी की वृद्धि हो रही है।"
सीआईआई के अनुसार भारत के सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश होने के बावजूद यहां आने वाले वर्षो के दौरान इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है। मौजूदा समय में दूध की मांग और आपूर्ति के बीच 18 लाख टन का अंतर है। वर्ष 2009 में उत्तर और पश्चिमोत्तर भारत में सूखे की स्थिति दूध और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की एक बड़ी वजह रही।
सूखे की वजह से फसल प्रभावित हुई और इस कारण पशुओं के चारे की पैदावार में भी कमी देखी गई। दुग्ध उत्पादन पर आने वाली लागत का 70 फीसदी हिस्सा चारे पर खर्च होता है। ऐसे में चारे के अभाव का असर दूध की कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है। सरकारी नीतियों की वजह से भी दूध की कीमतें प्रभावित हुईं।
सीआईआई ने दूध की कीमतों में कमी लाने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। पहला सुझाव पशु चारे की उपलब्धता को बढ़ाना है। अपने दूसरे सुझाव में इस संस्था का कहना है कि चारे की पैदावार को बढ़ाने के लिए उत्तम किस्म की बीज उपलब्ध कराएं जाएं। अच्छी गुणवत्ता वाला चारे से पशुओं में दूध का उत्पादन बढ़ सकता है। तीसरा सुझाव दूध देने वाले पशुओं के मांस के निर्यात पर रोक लगाने का है।
अल्पकालिक उपायों के तौर पर सीआईआई का कहना है कि परिवहन और प्रसंस्करण के बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाए क्योंकि इससे दूध के कारोबार में वृद्धि आएगी और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सकेगा। सीआईआई ने कहा कि दीर्घकालिक कदम के रूप में दूध का उत्पादन व्यापक पैमाने पर बढ़ाना होगा।
सीआईआई ने कहा, "चारे की उपलब्धता और सिंचाई की सुविधा बढ़ाई जानी चाहिए। मौजूदा समय में खेती योग्य भूमि पर अनाज की पैदावार पर जोर दिया जाता है जिससे चारे का अभाव रहता है। इन कदमों के उठाए जाने से दूध की कीमतों के संदर्भ में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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