अधिकांश सांसद महिला विधेयक के खिलाफ : शरद यादव
नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। महिला आरक्षण विधेयक के प्रति अपना विरोध जारी रखते हुए जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा है कि 90 प्रतिशत सांसद इस विधेयक के खिलाफ हैं। इस विधेयक के तहत भारतीय विधायिकाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी हैं।
यादव ने एक साक्षात्कार में दावा किया, "यदि कोई भी पार्टी व्हीप जारी न करे तो 90 प्रतिशत सांसद इस विधेयक का विरोध करेंगे, चाहे वे संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) से हों या राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) से। चाहे वे पिछड़ी जाति से हों या अगड़ी जाति से, चाहे वे पुरुष हो या महिला सांसद।"
राज्यसभा में नौ मार्च को पारित हुआ विधेयक क्या लोकसभा में पेश किया जाएगा? यादव ने आईएएनएस से कहा, "आप यह सवाल संप्रग के प्रबंधकों से पूछ सकते हैं। लोकसभा में इस विधेयक का हमारी ओर से और समाजवादी पार्टी (सपा) व राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसी समान विचारधारा वाली पार्टियों की ओर से कड़ा विरोध किया जाएगा।"
यादव ने कहा, "और मैं आपसे कह सकता हूं कि यदि व्हीप न हो तो विधेयक पूरी तरह धराशायी हो जाएगा।"
जब महिला विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ था तो जद (यु) में मतभेद उभर आए थे। हालांकि जद (यु) के सात राज्यसभा सदस्यों में से अधिकांश ने विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन लोकसभा में पार्टी के 20 सांसदों ने यादव के नेतृत्व में विधेयक का विरोध किया था। जद (यु) नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधेयक का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि इस विधेयक का समय आ चुका है।
लेकिन लोकसभा में शरद यादव ने विधेयक का विरोध करने के लिए अन्य दो यादव नेताओं, मुलायम सिंह और लालू प्रसाद से हाथ मिलाया। उन्हें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का भी परोक्ष समर्थन मिला। तृणमूल के दो सांसद मतदान के समय राज्यसभा में उपस्थित नहीं रहे। जबकि तृणमूल कांग्रेस, संप्रग का हिस्सा है।
जद (यु) और अन्य पार्टियां, महिला आरक्षण के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था किए जाने की मांग कर रही हैं।
यादव के अनुसार विधेयक के वर्तमान स्वरूप से केवल महानगरों की संभ्रांत महिलाओं को लाभ होगा।
उन्होंने कहा, "इस विधेयक को केवल दिल्ली के कुछ गैरसरकारी संगठनों का समर्थन प्राप्त है।"
यादव ने कहा, "सभी पार्टियों को मुक्त चर्चा की अनुमति दी जाए और व्हीप वापस ले लिया जाए। उसके बाद सांसदों की स्पष्ट राय सुनी जाए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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