मदर टेरेसा को संत घोषित करने की वेटिकन से अपील
नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। मदर टेरेसा की जन्म शताब्दी मनाने के लिए जहां कैथोलिक चर्च ने 26 अगस्त के लिए कई कार्यक्रम तैयार किए हैं, वहीं दूसरी ओर मदर टेरेसा के अनुयायियों ने वेटिकन से आग्रह किया है कि मदर टेरेसा को औपचारिक रूप से संत घोषित किया जाए। टेरेसा ने अपना पूरा जीवन कुष्ठ रोगियों और गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया था।
मदर टेरेसा को वर्ष 2003 में वेटिकन द्वारा 'ब्लेस्ड' की उपाधि से सम्मानित किया गया था। यह उपाधि लोगों को उनके नाम पर चैपेल (गिरिजाघर) स्थापित करने की अनुमति देती है।
चर्च सूत्रों ने कहा है कि विभिन्न धर्मो के कई सारे लोगों ने तथा कैथोलिक संगठनों ने मदर टेरेसा को उनकी जन्म शताब्दी पर संत की उपाधि प्रदान करने के लिए पोप को अलग-अलग लिखा है। पोप को भेजे कुछ पत्रों की प्रतियां कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) के पास मौजूद हैं। देश में कैथोलिक चर्च की यह सर्वोच्च संस्था है।
सीबीसीआई के प्रवक्ता बाबू जोसेफ ने आईएएनएस को बताया, "हम मदर टेरेसा के अनुयायियों (कैथोलिक और अन्य धर्मो के) की भावनाओं को महसूस करते हैं। लेकिन संत घोषित करने की जांच प्रक्रिया अपना पूरा समय लेगी।"
शताब्दी समारोहों के संयोजक जोसेफ के अनुसार संत घोषित करने की प्रक्रिया वर्षो में पूरी होती है। जोसेफ ने कहा, "किसी को संत घोषित करने के पहले चर्च कठिन और लंबी प्रक्रिया से गुजरता है। मदर टेरेसा को चर्च पहले ही 'ब्लेस्ड' की उपाधि से सम्मानित कर चुका है।"
सिस्टर अलफोंसा अंतिम भारतीय थीं, जिन्हें संत की उपाधि प्रदान की गई थी। केरल की अलफोंसा को उनके निधन के 40 वर्ष बाद पोप जॉन पाल द्वितीय द्वारा 1986 में बेटीफाइड किया गया था। इसके 22 वर्ष बाद 12 अक्टूबर, 2008 को उन्हें संत घोषित किया गया था। अलफोंसा के पहले गोनसालो गार्सिया को 19वीं शताब्दी में संत घोषित किया गया था। गार्सिया का जन्म मुंबई के निकट वसई में हुआ था। उनकी मां भारतीय थीं और पिता पुर्तगाली थे।
यदि मदर टेरेसा को संत घोषित किया जाता है तो यह उपाधि हासिल करने वाली वह तीसरी भारतीय होंगी।
लेकिन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य वी.वी.आगस्टिन का कहना है, "मेरे लिए और अन्य लोगों के लिए, जो उनके कार्यो को जानते हैं, वह पहले से ही संत हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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