हड़ताल से पश्चिम बंगाल में जनजीवन अस्त-व्यस्त
कोलकाता, 26 जून (आईएएनएस)। ईंधन कीमतों में वृद्धि के खिलाफ श्रमिक संगठन सीटू द्वारा आयोजित हड़ताल के चलते पश्चिम बंगाल में शनिवार को यातायात व्यवस्था ठप्प हो गई और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
बस, ऑटोरिक्शा और टैक्सियां नहीं चलने से सरकारी कर्मचारियों का अवकाश होने के बावजूद आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
यहां की विभिन्न नदियों में यातायात के लिए उपयोग की जाने वाली नावें भी नहीं चल रही हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से संबद्ध श्रमिक संगठन सीटू द्वारा इस हड़ताल की घोषणा केंद्र सरकार द्वारा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के फैसले के कुछ ही घंटे बाद की गई थी।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल की कीमतों से सब्सिडी वापस ले ली है जिससे इसके दाम में 3.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, वहीं सरकार ने डीजल के दाम दो रुपये प्रति लीटर, केरोसीन के दाम तीन रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस के दाम 35 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ा दिए हैं।
ट्रक और मोटर वाहनों के अभाव में लोग माल ढुलाई के लिए साइकिल रिक्शा और हाथ से चलते वाले ठेलों का सहारा ले रहे हैं लेकिन इसके लिए उन्हें काफी ज्यादा किराया चुकाना पड़ रहा है।
कोलकाता के निवासी अमित विश्वास ने कहा, "मैं क्या कर सकता हूं, मुझे अपनी नौकरी के इंटरव्यू के लिए बल्लीगांव जाना था मैंने रिक्शे वाले को 100 रुपये किराया चुकाया है। आखिर हमारे लिए परेशानियां क्यों पैदा की जाती हैं और सारी हड़तालें बंगाल में ही क्यों होती हैं।"
हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशनों पर लोगों को यातायात के साधन नहीं मिलने से भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
निजी उपयोग के वाहन हड़ताल में शामिल नहीं हैं, मेट्रो रेलवे सेवा को भी हड़ताल से छूट दी गई है।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र सिंह ने आईएएनएस से कहा, "हड़ताल के दौरान किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है, हालात पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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