पेट्रोल, डीजल, केरोसीन व रसोई गैस हुए महंगे (राउंडअप-इंट्रो)
अब पेट्रोल 3.50 रुपये प्रति लीटर, डीजल दो रुपये प्रति लीटर, केरोसीन 3 रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस 35 रुपये प्रति सिलेंडर महंगे हो गए हैं। नई दरें शुक्रवार आधी रात से लागू होंगी। इस फैसले से सरकार को वित्तीय स्थिति सुधारने और अन्य कार्यक्रमों के लिए धन जारी करने में मदद मिलेगी।
कीमतों में वृद्धि को उचित ठहराते हुए कांग्रेस ने कहा है कि सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था जबकि सरकार में सहयोगी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है। सहयोगी डीएमके ने इसे जनता पर बोझ करार दिया है।
विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम दलों ने इसे महंगाई बढ़ाने वाला कदम करार देते हुए कीमतों में वृद्धि को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
कीमतों के विरोध में माकपा से संबंध मजदूर संघ सीटू ने पश्चिम बंगाल में शनिवार को 24 घंटे के बंदे का आह्वान किया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले उच्चाधिकार प्राप्त मंत्री समूह ने शुक्रवार को ईंधन की कीमतों को बाजार आधारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इससे तेल खनन और विपरण करने वाली कंपनियों की वित्तीय सेहत में सुधार आएगी।
बैठक के बाद पेट्रोलियम सचिव एस. सुंदरेशन ने कहा कि रिफायनरी के स्तर पर और खुदरा बिक्री के स्तर पर पेट्रोल की कीमत बाजार द्वारा तय की जाएगी। इसके परिणाम स्वरूप पेट्रोल की कीमत 3.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ जाएगी।
सरकार के इस फैसले से पहले से ही आसमान छू रही महंगाई के और बढ़ने की संभावना है।
इस बारे में सुंदरेशन ने पत्रकारों से कहा, "हम लोगों की भावना से पूरी तरह अवगत हैं। इसके कारण होने वाली कुछ परेशानियों को हम समझते हैं। लेकिन देश की अर्थव्यवस्था के हित में यह पूरी तरह से जरूरी है कि उपभोक्ता भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई वृद्धि में हिस्सेदार बनें।"
उन्होंने कहा कि अंतत: डीजल की कीमत को भी बाजार आधारित बनाना पड़ेगा, लेकिन सरकार केरोसीन और रसोई गैस की कीमत पर नियंत्रण कायम रखेगी।
मंत्री समूह ने किरीट पारेख समिति की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला लिया है। समिति ने ईंधन की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने की वकालत की है।
सुंदरेशन कहा, "देश में पेट्रोल के उपभोक्ता बाजार आधारित कीमत, जो बहुत ही वाजिब है, को आसानी से सहन कर लेंगे।"
उन्होंने कहा कि कीमतों में वृद्धि के बावजूद वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर तेल कंपनियों को करीब 53 हजार करोड़ रुपये का घाटा होगा।
उच्चाधिकार प्राप्त मंत्री समूह की सदस्य होने के बावजूद रेल मंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार की बैठक में शामिल नहीं हुईं। इस बारे में पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित थीं लेकिन आज वह बैठक में क्यों नहीं आईं इस बारे में उनके पास कोई सूचना नहीं है।"
इसके बाद राजधानी में ही मौजूद ममता ने कीमतों में वृद्धि पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि इससे आम आदमी पर बोझ पड़ेगा। उन्होंने हालांकि संप्रग की सरकार से अलग होने से इंकार किया।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मेरी पार्टी इस मूल्य वृद्धि के समर्थन में नहीं है, इससे आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। सरकार डीजल, केरोसीन और एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी के फैसले पर पुनर्विचार करे।"
उन्होंने कहा कि डीजल और केरोसीन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर गरीबों पर पड़ेगा, हालांकि उन्होंने कहा, "सरकार को हमारा समर्थन जारी रहेगा और हम सरकार गिराना नहीं चाहते हैं।"
उधर, कीमतों में बढ़ोतरी का तीखा विरोध करते हुए वामपंथी दलों ने कहा कि खाद्य पदार्थो और जरूरी चीजों की महंगाई से जूझ रहे लोगों पर ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी गहरा आघात है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लॉक (एआईएफबी), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने अपने संयुक्त बयान में कहा, "सरकार इस बढ़ोतरी को सही साबित करने के लिए गलत जानकारियां दे रही है।" ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए वाम दलों ने कहा कि वे इस वृद्धि का देश व्यापी विरोध करेंगे।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "ईंधन की कीमतों में वृद्धि के फैसले को तुरंत वापस लेने की हम मांग करते हैं.. सरकार ने चुनाव जीतने के बाद लोगों के विश्वास के साथ मजाक किया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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