पूरे जोश में हुआ 'क्वीन्स बैटन' का स्वागत (लीड-3)
राष्ट्रमंडल में शामिल देशों में लगभग 170,000 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद मशाल शुक्रवार सुबह 9.25 बजे भारतीय सीमा में पहुंची। इसी के साथ इस मशाल की भारत में यात्रा शुरू हो गई। अब यह मशाल देश के 28 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में 20,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए 30 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचेगी।
पाकिस्तान ओलंपिक संघ के अध्यक्ष आरिफ हसन ने मशाल भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को वाघा सीमा पर सौंपी। इस मौके पर कलमाड़ी ने राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी हासिल करने में पाकिस्तान के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रमंडल खेलों का भव्य और सफल आयोजन होगा।
इस अवसर पर कलमाड़ी के अलावा पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटील, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर कई ओलंपियन और सियासी व खेल जगत की कई हस्तियां मौजूद थीं।
अटारी सीमा चौकी पर मशाल का स्वागत करने के लिए जोरदार तैयारियां की गईं थीं। उत्सव के माहौल के बीच यहां सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध किए गए थे। मशाल के स्वागत के लिए उमड़े लोग यहां मशहूर गाने 'चक दे इंडिया' की धुन मदमस्त देखे गए।
मशाल के पहुंचने से पहले सांस्कृतिक समारोह का आयोजन भी हुआ। इसमें सूफी गायकों-वडाली बंधुओं और लोकप्रिय गायक राहत फतेह अली खान ने यहां अपनी आवाज से समारोह में मौजूद लोगों को मंत्रमुगध कर दिया।
मशाल का भारत में स्वागत करने के बाद कलमाड़ी ने कहा, "भारतीय खेल इतिहास के लिहाज से यह एक महान दिन है। क्वींस बैटन रिले आखिरकार भारत पहुंच गई। इस मौके पर भारत और पाकिस्तान ने शानदार अंदाज में अपने उत्साह का प्रदर्शन किया। हम इस बात को लेकर बेहद खुश हैं कि रिले पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंची है। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए पाकिस्तान का सहयोग सराहनीय है।"
मशाल रिले अटारी से अमृतसर जाएगी और फिर भारत दौरे पर निकलेगी। सबसे पहले उसे जम्मू-कश्मीर और फिर हिमाचल, उत्तराखंड के रास्ते देश के दूसरे हिस्सों में जाना है। मशाल को समूचे भारत में अपनी यात्रा पूरी करके सितंबर में भारत पहुंचना है।
तीन अक्टूबर को इसके माध्यम से राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत की जाएगी। गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में तीन से 14 अक्टूबर तक राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया जाएगा। वर्ष 1982 में देश में हुए एशियाई खेलों के बाद यह खेलों के लिहाज से सबसे बड़ा आयोजन होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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