गैस त्रासदी : शिवराज ने कहा, 15 हजार लोगों को मिले मुआवजा
मंत्री समूह की सिफारिश में 10 हजार 47 लोगों को मृतकों की श्रेणी में न रखकर गंभीर घायल के तौर पर मुआवजा देने की बात कही गई है। गुरुवार को लिखे गए पत्र में चौहान ने उन पांच लाख 21 आंशिक गैस पीड़ितों को भी मुआवजा देने का अनुरोध किया है, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने पीड़ित करार दिया था।
गैस हादसे के बाद की पहली रिपोर्ट में मृतकों की संख्या पांच हजार और पीड़ितों की संख्या लगभग 42 हजार बताई गई थी। इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई थी जिसमें मरने वालों की संख्या 15 हजार और पीड़ितों की संख्या पांच लाख से अधिक बताई गई। इसमें 10,047 लोगों की मौत गैस रिसाव के तत्काल बाद नहीं हुई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में इसे सही माना था।
मंत्री समूह ने पहली रिपोर्ट को आधार मानकर सिफारिशें की हैं, इससे सिर्फ पांच हजार मृतकों के परिजनों और 42 हजार बीमारों को ही मुआवजे का लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में अन्य 20 वाडरें को भी गैस प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग करते हुए कहा गया है कि गैस के प्रभाव को भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसलिए शहर के अन्य वार्डो को न्योचित मुआवजा मिलना चाहिए। अभी तक सिर्फ 36 वार्डो को गैस प्रभावित माना जाता है।
पत्र में कहा गया है कि दो-तीन दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी गैस की घटना दुनिया की भयावह औद्योगिक व पर्यावरणीय त्रासदी थी। इस घटना के तुरंत बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने को बंद कर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
केंद्र सरकार ने 'भोपाल गैस लीकेज डिजास्टर एक्ट 1985' पारित कर मुआवजे से संबंधित सारे अधिकार अपने पास ले लिए थे। इस पत्र में सात जून को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भोपाल के फैसले का भी हवाला दिया गया हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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