नीतीश की गतिविधियों पर हमारी निगाह : पासवान
नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रिश्तों में आई दरार पर लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने 'वेट एंड वाच' की रणनीति अपनाई है। इसी साल बिहार में विधानसभा का चुनाव होना है।
पासवान ने सोमवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हमें देखना होगा कि नीतीश कहीं चुनावी ड्रामा तो नहीं कर रहे हैं। उन्हें पिछले साढ़े चार वर्षो तक भाजपा, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कोई परेशानी नहीं हुई और अब अचानक उनमें यह बदलाव क्यों।"
पासवान ने कहा, "अंतिम समय में नीतीश के इस रुख से उन्हें चुनाव में फायदा नहीं मिलने वाला है।"
नीतीश कुमार अगड़ी जातियों के साथ-साथ समाज के अन्य वर्गो का विश्वास खो चुके हैं। संभवत: उन्होंने यही सोचकर मोदी का विरोध किया कि वह किसी तरह से अल्पसंख्यक मतदाताओं को रिझा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में सारी सुविधाएं नीतीश ने ही मुहैया कराई थी, जिसमें मोदी भी शरीक थे।
पासवान ने कहा, "20 वर्षो के बाद बिहार में आरएसएस का राष्ट्रीय स्तर का शिविर बिहार में नीतीश राज में लगा था। नीतीश ने मोदी का पैसा तो लौटा दिया लेकिन उन्होंने इस शिविर की अनुमति क्यों दी। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उस राशि को अभी तक खर्च क्यों नहीं किया गया था। नीतीश का यह रुख पूरी तरह राजनीतिक है। इसका विचारधारा से कोई लेना देना नहीं है।"
उन्होंने कहा, "गुजरात में जब गोधरा हुआ था नीतीश उस समय केंद्र सरकार में मंत्री थे। इसके विरोध में मैंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन नीतीश मंत्रिमंडल में बने रहे।"
उन्होंने दावा किया कि बिहार विधानसभा के अगले चुनाव में भाजपा-जद (यू) गठबंधन और राष्ट्रीय जनता दल (राजद)-लोजपा गठबंधन में सीधा मुकाबला होगा। हमने इसकी तैयारियां आरंभ भी कर दी है और सीटों के तालमेल की प्रक्रिया जारी है।
पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी चाहेगी कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) भी हमारे साथ मिलकर चुनाव लड़े लेकिन राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद इसके खिलाफ हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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