असम का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बना तस्करी का केंद्र
एक सप्ताह के भीतर ही सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बाघ के कंकाल और छिपकली के अंग बरामद किए हैं। इन अंगों की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 5 करोड़ रुपये से ऊपर बताई गई है।
पूर्वोत्तर के सीमा शुल्क आयुक्त एस. आर. बरुआ ने आईएएनएस को बताया, "वर्तमान में कंकालों की बड़े पैमाने पर बरामदगी होने के बाद जाहिर होता है कि गुवाहाटी तस्करों का गढ़ बन चुका है। वे म्यांमार के रास्ते चीन और सुदूर पूर्व एशिया में जानवरों के कंकालों की तस्करी करते हैं।"
भारत और म्यामार के बीच 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा है। तस्करों के काम करने के तरीके ने सीमा शुल्क अधिकारियों को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करने के लिए बाध्य कर दिया है।
उदाहरण के तौर पर यदि देखा जाए तो तस्करी करने वाले और तस्करी का सामान लेने वाले दोनों के ठिकानों की जानकारी नहीं है। तस्करों का ठिकाना पीतर तथा दीमापुर में हो सकता है लेकिन उनके ठिकानों का पता लगाना आसान काम नहीं है।
सीमा शुल्क के अधिकारियों ने रविवार को हवाई अड्डे से रॉयल बंगाल टाइगर के कंकाल और छिपकली के 271 किलोग्राम अवशेष बरामद किए गए जिसमें से उड़ीसा से 146 किलोग्राम तथा दीमापुर से 125 किलोग्राम अवशेष लाए गए थे।
गौरतलब है कि एक सप्ताह के भीतर सीमा शुल्क के अधिकारियों ने तीसरी बार गुवाहाटी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जानवरों के कंकालों व उनके अवशेष को इतनी बड़ी मात्रा में बरामद किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications