ईरान में सुन्नी नेता को फांसी

ईरान में सुन्नी नेता को फांसी

ईरान ने एक सुन्नी चरमपंथी गुट के नेता को ‘आतंकवादी’ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में फांसी पर लटका दिया है.

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी का कहना है कि जुंदुल्लाह के नेता अब्दुल मलिक रिगि को तेहरान की एक जेल में रविवार की सुबह उनके परिवारवालों की मौजूदगी में फांसी पर लटका दिया गया.

रिगि पर सिस्तान-बलोचिस्तान प्रांत में हुए कई बम धमाकों के पीछे हाथ होने का आरोप था.

उनकी गिरफ़्तारी फ़रवरी में दुबई से किर्गिस्तान की हवाई यात्रा के दौरान हुई थी.

जुंदुल्लाह संगठन का गठन 2003 में हुआ और उनका कहना है कि वे बलोच लोगों के मानवाधिकार और संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं.

ईरान के ज़्यादातर बलोच नागरिक सिस्तान-बलोचिस्तान इलाक़े में रहते हैं और सुन्नी समुदाय के हैं. उनका दावा है कि शिया बहुल ईरान में अल्पमत में होने की वजह से उनके साथ भेदभाव होता है और उन्हें निशाना बनाया जाता है.

ये इलाक़ा काफ़ी ग़रीब और पिछड़ा है और यहां की आबादी भी कम है. नशीली दवाओं का अवैध व्यापार, अपहरण और हथियारबंद संघर्ष यहां की बड़ी समस्या है.

ईरान सरकार का आरोप है कि जुंदुल्लाह को अमरीका, ब्रिटेन और पाकिस्तान से मदद मिलती है. तीनों ही देश इस आरोप का खंडन करते हैं.

फांसी की सज़ा सुनाते हुए ईरान की अदालत ने ज़ुंदुल्लाह को 2003 से 154 सुरक्षा सैनिकों की मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियो के साथ मिले होने का आरोप लगाया.

जुंदुल्लाह कह चुका है कि वो सिस्तान-बलोचिस्तान में हुए कई बड़े हमलों के लिए ज़िम्मेदार है. इनमें पाकिस्तान की सीमा से लगे इलाक़े में हुआ वो धमाका भी शामिल है जिसमें 42 लोग मारे गए थे.

रिगि के छोटे भाई अब्दुल हमीद को 2008 में पाकिस्तान में गिरफ़्तार किया गया था और ईरान के हवाले कर दिया गया था. सरकारी मीडिया ने ख़बर दी थी कि उन्हें पिछले महीने आतंकवाद के आरोप में फांसी दे दी गई.

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