नागरिकों की हत्या नहीं की गई : राजपक्षे
राजपक्षे ने देश में तीन दशक तक चले गृह युद्ध की समाप्ति की पहली वर्षगांठ पर आतंकवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाले देशों को सचेत किया।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक राष्ट्र को संबोधित करत हुए राजपक्षे ने तमिल विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष में कथित युद्ध अपराधों के आरोपों की अंतर्राष्ट्रीय जांच की मांग का खंडन किया।
संयुक्त राष्ट्र एक समिति गठित करने पर विचार कर रहा है जो मानवाधिकार से जुड़े मामले देखेगी। श्रीलंका ने एक आयोग का गठन किया है जो कथित आरोपों की जांच करेगा लेकिन अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण के गठन की मांग को खारिज कर दिया है।
राजपक्षे ने कोलंबो में विजय दिवस उत्सव की अध्यक्षता की। एक साल पहले मई महीने में श्रीलंकाई सेना ने तमिल विद्रोहियों पर विजय हासिल किया था। मई में देश में बाढ़ की स्थिति के कारण उत्सव नहीं मनाया जा सका था।
राजपक्षे ने कहा कि इस गलत रास्ते पर दुनिया काफी आगे निकल चुकी है।
उन्होंने कहा, "आतंकवाद पर आज भी काबू नहीं पाया जा सका है क्योंकि इसके पीछे गलत सोच है। मैं यह कहना चाहूंगा कि जो देश आतंकवाद और अलगाववाद को समर्थन देते हैं वह भी एक दिन इससे पीड़ित होगा। इसका इतिहास गवाह है।"
इस युद्ध की अगुवाई करने वाले सेना प्रमुख सरथ फोंसेका इस समारोह में शामिल नहीं हो पाए। वह सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में इन दिनों सेना की हिरासत में हैं।
उल्लेखनीय है कि तीन दशक तक चले तमिल विद्रोहियों के साथ संघर्ष में 80,000 लोगों की मौत हुई। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार युद्ध के अंतिम चरण में 7,000 नागरिकों की मौत हुई जिसकी काफी आलोचना हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications