झारखण्ड की राज्यसभा सीटों पर बाहरी उम्मीदवारों का बोलबाला
रांची, 18 जून (आईएएनएस)। राज्यसभा में झारखण्ड के प्रतिनिधि के तौर पर इस बार भी बाहरी उम्मीदवारों का ही बोलबाला रहेगा।
प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में भी गुरुवार को एक बाहरी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
प्रदेश से राज्यसभा की छह सीटों में से अब चार पर बाहरी उम्मीदवारों का कब्जा है। इनमें से कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के एक-एक सदस्य हैं जबकि एक निर्दलीय है।
कांग्रेस की माबेल रिबेलो, भाजपा के एस. एस. अहलूवािलया,, झामुमो के के. डी. सिंह और निर्दलीय परिमल नथवानी इस प्रदेश से राज्यसभा में हैं।
सिंह चंडीगढ़ के उद्योगपति हैं तो नथवानी गुजरात के जाने-माने उद्योगपति। रिबेलो कर्नाटक से समाज सेविका हैं तो अहलूवालिया मूलत: पंजाब के हैं लेकिन पश्चिम बंगाल उनका कार्यक्षेत्र रहा है।
बहरहाल, प्रदेश के कुछ राजनीतिज्ञों के अनुसार राज्यसभा में बाहरी उम्मीदवारों के भेजे जाने में कुछ भी गलत नहीं है जबकि कुछ का कहना है कि वे राज्यसभा के लिए उद्योगपतियों का 'आयात' करने के पक्ष में नहीं हैं।
प्रदेश कांग्रेस के महासचिव शैलेश सिन्हा कहते हैं, "राज्यसभा चुनावों में सीमओं का बंधन कोई मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि संबंधित व्यक्ति का सामाजिक और राजनीतिक इतिहास कैसा है।"
उन्होंने कहा, "पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ता को किसी भी प्रदेश से राज्यसभा में भेजा जा सकता है। यदि कोई उद्योगपति राज्य की बेहतरी के लिए राज्यसभा में जाना चाहता है तो उसका विरोध बेमानी है। हम उन उद्योगपतियों के विरोध में हैं जो राज्यसभा तो पहुंच जाते हैं लेकिन राज्य के हित में कोई काम नहीं करते।"
झारखण्ड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा, "हम उद्योगपतियों के आयात के पक्ष में नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रदेश के लोगों को ही राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि राज्य में राज्यसभा चुनावों में इस बार बाहरी और भीतरी उम्मीदवार एक मुद्दा भी था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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