नीतीश पर भाजपा से अलग होने का दबाव बढ़ा
पटना, 13 जून (आईएएनएस)। जनता दल (युनाइटेड) के अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का साथ छोड़ने और राज्य विधानसभा का आगामी चुनाव अकेले लड़ने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
इन नेताओं की दलील है कि जिस प्रकार राष्ट्रीय जनता दल (राजद)के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा रोक कर रातोंरात मुसलमानों के सबसे बड़े रहनुमा की छवि बना ली थी, इसी तरह आज नीतीश के पास यही मौका है कि वह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को बिहार में ही रोक कर मुसलमानों के सबसे बड़े मसीहा बनें।
जद (यु) के लोकसभा सदस्य मोनाजिर हसन, राज्यसभा सदस्य अली अनवर सहित पार्टी के अन्य अल्पसंख्यक नेताओं ने शनिवार रात नीतीश से भेंट कर भाजपा से नाता तोड़कर चुनावी मैदान में अकेले दम उतरने की सलाह दी है। ध्यान देने की बात यह है कि जद (यु) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी नीतीश को यही सलाह दी है।
उल्लेखनीय है कि मोदी से जुड़े विज्ञापनों पर जद (यु) में खासा रोष है। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सार्वजनिक तौर पर मोदी की कड़ी आलोचना की थी।
मौजूदा विवाद पर पार्टी के सांसद अली अनवर ने आईएएनएस से बातचीत में शायराना अंदाज में यह टिप्पणी की, "इनकी महफिल भी गई, इनके चाहने वाले वाले भी गए। अभी यहां आकर बैठे भी नहीं थे, कि निकाले गए।"
उन्होंने कहा, "नीतीश ने कल मोदी को धोबियापाठ पढ़ा दिया है। मेरा मानना है कि जद (यु)को भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने का वक्त आ गया है। ऐसा होता है तो अगले चुनाव में नीतीश कुमार भारी बहुमत से सत्ता में वापसी करेंगे।"
मोनाजिर हसन ने आईएएनएस से कहा, "भाजपा को नीतीश कुमार की मुसलमानों से दोस्ती अच्छी नहीं लग रही है। उन्होंने सुनियोजित साजिश के तहत पूरे राज्य में मोदी के इश्तहार छपवाए। मोदी की छवि साम्प्रदायिक है जबकि नीतीश धर्मनिरपेक्ष हैं। यह नीतीश को सत्ता से बेदखल करने की साजिश भी है। भाजपा से अलग होने का यही अच्छा अवसर है।"
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बहुसंख्यक नेताओं का मानना है कि जद (यु)को भाजपा के साथ गठबंधन से अलग हो जाना चाहिए और अपने बूते चुनाव में उतरना चाहिए। जद (यु)यदि अकेले चुनाव में उतरती है तो उसे 243 में से 150 सीटों पर सफलता मिलेगी।
ललन सिंह ने भी नीतीश से भेंट कर भाजपा से गठबंधन तोड़ने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि विज्ञापन में मोदी और नीतीश को साथ-साथ दिखाकर उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि को तार-तार करने की कोशिश की गई है। उन्हें भाजपा से तत्काल संबंध तोड़ लेना चाहिए।
ध्यान देने की बात है कि मुसलमानों के रहनुमा बनने के बाद लालू ने एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण के सहारे बिहार की सत्ता पर 15 वर्षो तक शासन किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications