भाजपा ने महंगाई, नक्सली हिंसा पर सोनिया, संप्रग पर निशाना साधा (राउंडअप)
राष्ट्रीय कार्यकारिणी का समापन करते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि पार्टी के सम्मान और अनुशासन के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का हवाला देते हुए ये बातें कहीं।
पार्टी एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा कि गडकरी ने पार्टी नेताओं से हदों में रहने की हिदायत भी दी।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समापन अवसर पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित बिहार स्वाभिमान रैली में भाजपा के तमाम वक्ताओं ने संप्रग सरकार पर हमला किया।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में मचे विज्ञापन विवाद पर पहली बार अपना मुंह खोलते हुए बिना नाम लिए नीतीश को अप्रत्यक्ष रूप से विकास का हवाला देते हुए वोटबैंक की राजनीति से बचने की नसीहत दी।
भोपाल गैस कांड पर उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इस मसले पर चुप्पी तोड़ें और जवाब दें कि भोपाल के हजारों लोगों की मौत का सौदागर कौन था।
उन्होंने इस मौके पर बिहारवासियों को गुजरात के विकास का सपना भी दिखाया और दोनों राज्यों के रिश्तों को महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण से भी जोड़ा।
ज्ञात हो कि कार्यसमिति के पहले दिन से ही विज्ञापन विवाद को लेकर नीतीश और मोदी आमने-सामने आ गए थे। शनिवार को नीतीश ने मोदी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनका बिहार में क्या काम है। उन्होंने कोसी राहत के लिए गुजरात की ओर से भेजी गई राशि लौटाने तक की बात कह दी थी।
माना जा रहा था कि मोदी स्वाभिमान रैली में इसका जवाब देंगे और उन्होंने बड़ी ही साफगोई के साथ ऐसा किया भी।
मोदी ने पहले तो अपने संबोधन में बिहार और गुजरात के बीच ऐतिहासिक रिश्तों का हवाला देते हुए कहा कि महात्मा गांधी जन्मे थे गुजरात में लेकिन उन्होंने सत्याग्रह की शुरुआत बिहार से की। इसी प्रकार लोकनायक जयप्रकाश नारायण जन्मे बिहार में लेकिन उनके संपूर्ण क्रांति की आंच गुजरात तक भी पहुंची और गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन खड़ा हुआ, जिसके मार्फत 12 जून 1975 को वहां पहली बार जनता मोर्चा की सरकार बनी।
उन्होंने यह हवाला देते हुए दोनों राज्यों के रिश्तों को परिभाषित करने की कोशिश की कि देश के मान चिह्न में अशोक स्तंभ के साथ तीन शेर भी विराजमान होते हैं। यह स्तंभ बिहार से है तो शेर गुजरात से।
भोपाल गैस त्रासदी के बहाने मोदी ने सोनिया पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भोपाल कांड के दोषियों को बचाने के मसले पर सोनिया मौन क्यों है। अपने चिरपरिचित अंदाज में मोदी ने कहा, "मैडम सोनिया जी मौन तोड़ो, मौन खोलो और देश को बताओ कि आखिर भोपाल के हजारों लोगों की मौत का सौदागर कौन था। हुआ क्या था आखिर। इतनी बड़ी घटना है लेकिन सोनिया मौन है।"
रैली के समापन भाषण में भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार को परिवार के मुखिया की तरह मोदी-नीतीश विज्ञापन विवाद का पार्टी की ओर से पटाक्षेप करने की कोशिश की।
उन्होंने नीतीश कुमार को राजग गठबंधन का सबसे पुराना और वफादार साथी होने का हवाला देते हुए कहा कि हाथ मिलाने से गठबंधन में गांठ पैदा नहीं होती बल्कि स्नेह बढ़ता है। मुझे खुशी होती यदि नीतीश इस रैली में शामिल होते।
राजग के कार्यकारी अध्यक्ष आडवाणी ने गठबंधन के मुखिया की भूमिका का निर्वाह करते हुए इस विवाद का यह कहते हुए पटाक्षेप करने की कोशिश की कि गठबंधन में थोड़ी बहुत कटुता होती रहती है। इसकी शुरुआत एक विज्ञापन से हुई थी। मैंने जब आज का अखबार देखा तो उसमें छपा था 'गठबंधन में गांठ'। मुझे समझ में नहीं आता कि हाथ मिलाने से गठबंधन में गांठ कैसे पड़ सकती है। यह तो स्नेह का प्रतीक है।
उन्होंने वर्ष 1995 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस वक्त मुंबई के रेसकोर्स में पार्टी के अधिवेशन के दौरान नीतीश से अनायास मुलाकात हुई थी और मेरे आग्रह पर वह इसमें शामिल भी हुए थे। इसके बाद वह राजग के प्रमुख नेता बन गए।
आडवाणी ने कहा कि अटलजी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में छह वषरें तक सफल रूप से अपने दायित्वों का निर्वाह किया। बिहार में लालू के 15 वषरें के कुशासन से यहां की जनता को मुक्ति दिलाकर सुशासन स्थापित करने में हमारे सहयोगियों ने भी उनका पूरा साथ दिया।
आडवाणी ने इस मौके पर कहा कि बिहार के स्वाभिमान के लिए वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। वाराणसी, चेन्नई, विशाखपट्टनम, मुंबई की तर्ज पर पटना का नाम पाटलिपुत्र रखने और दिल्ली गेट या गेटवे ऑफ इंडिया की तर्ज पर गंगा तट पर सभ्यता द्वार और गंगा किनारे मरीन डाइव बनाने की मांग भी की। यह कदम बिहार के स्वाभिमान को आगे बढ़ाएगा।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वरिष्ठ नेता, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू, अनंत कुमार और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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