आडवाणी ने किया मोदी-नीतीश विवाद का पटाक्षेप (लीड-1)
उन्होंने नीतीश कुमार को राजग गठबंधन का सबसे पुराना और वफादार साथी होने का हवाला देते हुए कहा कि हाथ मिलाने से गठबंधन में गांठ पैदा नहीं होती बल्कि स्नेह बढ़ता है। मुझे खुशी होती यदि नीतीश इस रैली में शामिल होते।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के अवसर पर पार्टी की ओर से पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित बिहार स्वाभिमान रैली को संबोधित करते हुए आडवाणी ने यह बात कही।
गौरतलब है कि मोदी से संबंधित कुछ विज्ञापनों को लेकर कार्यसमिति की बैठक के पहले ही दिन भाजपा और जद (यू) के बीच तलवारें खिंच गई थीं और गठबंधन टूटने तक की नौबत आ गई थी।
राजग के कार्यकारी अध्यक्ष आडवाणी ने गठबंधन के मुखिया की भूमिका का निर्वाह करते हुए इस विवाद का यह कहते हुए पटाक्षेप करने की कोशिश की कि गठबंधन में थोड़ी बहुत कटुता होती रहती है। इसकी शुरुआत एक विज्ञापन से हुई थी। मैंने जब आज का अखबार देखा तो उसमें छपा था 'गठबंधन में गांठ'। मुझे समझ में नहीं आता कि हाथ मिलाने से गठबंधन में गांठ कैसे पड़ सकती है। यह तो स्नेह का प्रतीक है।
उन्होंने वर्ष 1995 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस वक्त मुंबई के रेसकोर्स में पार्टी के अधिवेशन के दौरान नीतीश से अनायास मुलाकात हुई थी और मेरे आग्रह पर वह इसमें शामिल भी हुए थे। इसके बाद वह राजग के प्रमुख नेता बन गए।
आडवाणी ने कहा कि अटलजी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में छह वषरें तक सफल रूप से अपने दायित्वों का निर्वाह किया। बिहार में लालू के 15 वषरें के कुशासन से यहां की जनता को मुक्ति दिलाकर सुशासन स्थापित करने में हमारे सहयोगियों ने भी उनका पूरा साथ दिया।
आडवाणी ने इस मौके पर कहा कि बिहार के स्वाभिमान के लिए वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। वाराणसी, चेन्नई, विशाखपट्टनम, मुंबई की तर्ज पर पटना का नाम पाटलिपुत्र रखने और दिल्ली गेट या गेटवे ऑफ इंडिया की तर्ज पर गंगा तट पर सभ्यता द्वार और गंगा किनारे मरीन डाइव बनाने की मांग भी की। यह कदम बिहार के स्वाभिमान को आगे बढ़ाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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