भोपाल जैसे मामलों में सक्षम अभियोजन की जरूरत : सीबीआई प्रमुख

सीबीआई निदेशक ने कहा कि जांच एजेंसी अपने अभियोजन दल को और सक्षम बनाने के लिए कदम उठाएगी।

उन्होंने कहा कि 25 साल पहले हुई गैस त्रासदी जैसे मामले में शवों का पोस्टमार्टम करने से ज्यादा आगे बढ़कर कुछ कदम उठाए जाने चाहिए। भोपाल जैसा मामला दोबारा नहीं होना चाहिए लेकिन यदि कोई दुर्घटना होती है तो लोगों को तत्काल राहत भी मिलनी चाहिए।

कुमार ने कहा कि भोपाल गैस मामले का आरोपपत्र उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप था।

उन्होंने कहा, "आरोप पत्र के आधार पर तो सजा अधिकतम दी गई है।"

भोपाल की एक अदालत ने सात जून को यूनियन कार्बाइड के सात अधिकारियों को 1984 में हुए गैस लीक मामले में आपराधिक लापरवाही का दोषी मानते हुए उन्हें दो-दो साल की सजा सुनाई थी। इन सभी को तुरंत जमानत मिल गई।

इसके अलावा न्यायालय ने यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन प्रमुख केशव महिन्द्रा समेत सात लोगों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

आरोपियों ने 1996 में भोपाल की अदालत में सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी जिसमें आरोपियों को गैरइरादतन हत्या का आरोप शामिल था, इस आरोप में उन्हें 10 साल तक की अधिकतम सजा हो सकती थी।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ए.एम.अहमदी और एस.बी.मजूमदार ने रेखांकित किया था कि सीबीआई द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य आरोपियों पर केवल आईपीसी की धारा 304-ए (लापरवाही से मौत) के तहत ही मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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