दिल्ली में सड़कों से नहीं हटे तांगे
नई दिल्ली। ब्रिटिश औपनिवेशिक युग में कभी लोगों के लिए रोमांच से भरपूर यात्रा का अवसर मुहैया कराने वाले तांगों की आवाजाही पर यूं तो रविवार से दिल्ली नगर निगम का प्रतिबंध लागू हो गया, लेकिन यह अभी सड़कों से हटा नहीं है। नगर निगम ने दिल्ली की सड़कों पर तांगे को बंद करने के लिए 31 मई तक समय सीमा तय की थी, लेकिन बाद में तारीख छह जून तक बढ़ा दी गई थी।
निगम के आदेश के विपरीत रविवार को सूर्यास्त तक तांगे वाले सड़क पर बने रहे। तांगों के मालिक इसे सड़कों से हटाने की मन:स्थिति में नहीं हैं। तांगे वालों के प्रतिनिधि सलीम ने आईएएनएस को बताया, "हमें दिल्ली नगर निगम के आदेश का ध्यान है, लेकिन यह हमारा पुश्तैनी व्यवसाय है। हम इसे छोड़ना नहीं चाहते।" नगर निगम ने यह कहते हुए परिवहन के इस पुराने साधन को बंद करने का निर्णय लिया, ताकि भारी भीड़भाड़ वाले इलाकों में तांगों के कारण यातायात में व्यवधान पैदा न हो।
पढ़ें: इस माह का राशिफल
गौरतलब है कि दिल्ली में 232 लाइसेंसधारी तांगे वाले हैं। इनमें अकेल 130 तांगे पुरानी दिल्ली में चलते हैं। नगर निगम ने तांगे वालों के पुनर्वास के साथ उन्हें रोजगार देने की बात कही थी। निगम ने तहबाजारी के लिए पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में उनके लिए जगह आवंटित की है, लेकिन पुनर्वास की व्यवस्था अभी नहीं हो पाई है।
सलीम ने कहा, " निगम ने जब पुनर्वास योजना के लिए हमसे संपर्क किया, तब हमें लगा कि यह सचमुच गरीबी से लड़ने में मददगार साबित होगी, लेकिन हमें लगता है कि ठेले पर सामान बेचने का काम हमें और गरीब बना देगा।" निगम ने दिल्ली के 132 लाइसेंसधारी तांगे वालों को सार्वजनिक सुविधाओं से लैस भूखंड तैयार करके देने की बात भी कही है।
उधर, तांगेवालों का कहना है कि निगम ने शास्त्री पार्क के समीप जी.टी. रोड पर स्टाल तैयार करने की बजाय केवल फुटपाथ का निर्माण कराया है। पिछले 10 सालों से तांगा चलाने वाले सईद अब्दुल्ला ने कहा, "हमें नगर निगम ने तहबजारी करने के लिए पूर्वी दिल्ली में अनुमति दी है, लेकिन ज्यादतर लोग पुरानी दिल्ली में रहते हैं, लिहाजा रोजना शास्त्री पार्क सामान लेकर आने-जाने में दिक्कत होगी।"












Click it and Unblock the Notifications