शायद ममता बैनर्जी को दिल्ली याद आ जाए!

Mamata Banerjee
कोलकाता वार्ड चुनाव में ममता बैनर्जी की मेहनत रंग लायी है। इसमें कोई शक नहीं हैं ममता ने कोलकाता वार्ड चुनाव के लिए न सिर्फ दिन रात एक किया है बल्कि दिल्ली तक को ताक पर रख दिया। जिसके लिए विरोधियो ने भी उन्हें नहीं बख्शा, यहा तक की ममता को बयान तक देना पड़ा कि दिल्ली मेरा घर नहीं है, मेरा असली घर कोलकाता है।

कोलकाता वार्ड चुनाव में केन्द्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल ने अपना परचम लहरा दिया है और लेफ्ट को उसकी असली औकात बता दी है। तृणमूल ने141 सीटों में से 95 पर कब्जा जमा लिया है जबकि सीपीएम को एक बड़ा झटका लगा और उसे सिर्फ 33 सीटों से ही इस बार संतोष करना पड़ा जबकि कांग्रेस 7 और अन्य के खाते में चार सीटें गई हैं।

वार्ड चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बाद ममता ने कहा कि यह मेरी जीत नहीं बल्कि इसकी असली हकदार यहां की जनता है, जिसने यह ऐतिहासिक फैसला लिया। खैर ये तो नेताओं की आदत है कि अक्सर वो ऐसी जीत के बाद ऐसे ही बयान देते नजर आते हैं।

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ममता इस जीत के बाद अपनी चिरपरिचित छवि में नजर आयीं और बड़े ही बुलंद आवाज में कहा कि सीपीएम को अब सत्ता छोड़ देनी चाहिए। कांग्रेस से गठबंधन के बाबत उनका जवाब आया कि फैसला बातचीत के बाद लिया जायेगा। ममता ने बड़े ही रोबिले अंदाज में कहा कि पिछले 34 सालों से कोलकाता की जनता जुल्म और प्रताड़ना का शिकार है लेकिन उसने इस बात को पहचान लिया है कि क्या सही है और क्या गलत है। जिसका नतीजा ये चुनाव परिणाम है।

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खैर वार्ड चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं, कुर्सी पर कौन बैठेगा और किस तरह बैठेगा यही भी एक-दो दिनों में पता चल जायेगा, शायद इसके बाद ममता को दिल्ली और देश की प्रजा का ख्याल आ जाये । क्योंकि इस निकाय चुनाव के कारण ही ममता ने कैबिनेट की मीटिंग छोड़ी थी, ये चुनाव ही थे जो उन्हें दिल्ली में रहने से रोकते थे।

उनका ध्यान रेल पर कम और निकाय की गतिविधियों पर ज्यादा रहता था। काश की जो तेजाई और हौसला दीदी ने कोलकाता में दिखाया है वैसा ही कुछ वो अपने रेल मंत्रालय पर भी दिखाये, उनकी तेजी और रौब का असर रेलवे क्रासिंग सिग्नल और उन तमाम टुटी-फूटी या मैनुअली हैडिंल चीजों पर पड़े जिसके कारण आये दिन यात्रियों को कठिनाइयों और दुर्धटनाओं से दो-चार होना पड़ता है।

काश कि अब ममता बैनर्जी को समझ में आ जाये कि देश की जनता उनसे क्या चाहती है क्योंकि जितना मुश्किल किसी चीज को पाना है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है उस चीज की कद्र करना । शायद अब ममता को अपने रेलमंत्रालय की सुध आ जाये जिसको पाने के लिए ममता ने कांग्रेस की नाक में दम कर दिया था।

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