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पश्विम बंगाल निकाय चुनाव में 70 फीसदी मतदान (राउंडअप)

By Jaya Nigam
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ज्ञात हो कि मतदान ऐसे समय में हुआ है, जब शुक्रवार को पश्चिम मिदनापुर जिले में हुए ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे में 145 लोगों की मौत हो चुकी है।

कोलकाता में 65-70 प्रतिशत मतदाताओं ने 141 वार्डो में अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। लेकिन इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के कारण कई स्थानों पर मतदान प्रभावित हुआ।

मतादान का समय (अपराह्न् तीन बजे) समाप्त हो जाने के बाद भी मतदान जारी रहा, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग मतदान बूथ के बाहर लाइन लगाए खड़े थे।

यहां मतदान करने वालों में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेता व मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व रेल मंत्री ममता बनर्जी शामिल थीं।

पश्चिम कोलकाता के मटियाबुर्ज इलाके में एक मतदान केंद्र पर आतताइयों द्वारा बम फेंके जाने के बाद तीन लोग घायल हो गए। जबकि त्रिपुरा पुलिस के एक कांस्टेबल द्वारा अचानक गोलीबारी किए जाने के कारण एक व्यक्ति घायल हो गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "कांस्टेबल संदेह के घेरे में है। हम उससे पूछताछ कर रहे हैं कि आखिर उसने गोलीबारी क्यों की।"

शहर के बेलाघाट इलाके में माकपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके कारण मतदान कुछ समय के लिए रुक गया।

राज्य के 81 निकायों में से कोलकाता नगर निगम सहित 54 निकायों पर वाम मोर्चा का फिलहाल कब्जा है।

राज्य के बाकी जिलों में जहां 80 नगर निकायों के लिए मतदान हुए हैं, वहां 70-75 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले हैं। इस बीच हिंसा और मतदान प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने के आरोपों में 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यद्यपि पूरे राज्य में स्थिति व्यापक तौर पर शांतिपूर्ण रही, लेकिन कई स्थानों पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं। बर्दवान जिले के जमुरिया, हुगली के तारकेश्वर और उत्तरी 24 परगना के नैहाटी में दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं हैं। सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए लाठीचार्ज किया।

राज्य में सत्ताधारी वाम मोर्चा के अध्यक्ष विमान बोस ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए मतदाओं को बधाई दी।

इन चुनावों में लगभग 85 लाख मतदाता इस चुनाव में हिस्सा लेने के पात्र थे।

कुछ स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में भी गड़बड़ी की खबरें हैं। इससे मतदान प्रभावित हुआ है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मतदान का समय बढ़ाने की मांग की थी।

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर स्थानीय निकाय चुनावों को उनका सेमीफाइनल माना जा रहा है। अलबत्ता इस चुनाव में नागरिक समस्याओं की जगह राजनीतिक मुद्दे छाए रहे।

पिछले तीन दिनों से ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। इस दुर्घटना में 145 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले राजनीतिक हिंसा, साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने के लिए षडयंत्र रचे जाने, रेल मंत्रालय की कार्यप्रणाली और नक्सली हमले चुनावी मुद्दों के केंद्र में थे। इन मुद्दों की आड़ में वास्तविक समस्याएं मसलन बिजली, सड़क और पानी से जुड़े मुद्दे गायब हो गए हैं।

लोकसभा चुनाव के एक साल बाद हुए इस चुनाव में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं हो सका। सीटों के बंटवारें को लेकर दोनों दलों में सहमति नहीं बन सकी। प्रदेश के 81 स्थानीय निकायों में से वर्तमान में कोलकाता सहित 54 निकायों पर वाम मोर्चे का कब्जा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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