टूटे हुए दिलों के 'डॉक्टर फिक्सइट'

चण्डीगढ़, 31 मई (आईएएनएस)। न कभी दिल टूटा, न ली चिकित्सा की शिक्षा लेकिन फिर भी हैं 'डॉक्टर फिक्सइट'। टूटे हुए दिलों को जोड़ने का काम करने वाले रंजन वर्धन को उनके चहेते 'डॉक्टर रीहेबिलिटेशन', 'डॉक्टर फील-गुड' और 'डॉक्टर फिक्सइट' कहकर ही पुकारते हैं।

रंजन वर्धन चण्डीगढ़ में एक स्नात्कोत्तर कन्या महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं। उन्हें टूटे हुए दिलों को जोड़ने के अद्वितीय क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है लेकिन ऐसा सिर्फ उन लोगों के लिए नहीं है जिन्हें प्यार में निराशा हाथ लगती है।

वर्धन ने 1991 में चण्डीगढ़ में 'ब्रोकन हार्ट रीहेबिलिटेशन सोसायटी' स्थापित की थी। अब वह एक-दो महीने में टूटे हुए दिलों के लिए समर्पित एक वेबसाइट शुरू करने जा रहे हैं।

वर्धन ने आईएएनएस से कहा, "'ब्रोकन हार्ट' केवल प्यार में असफल होने वाले लोगों के लिए नहीं है। यह जिंदगी की ऐसी कोई भी असफलता हो सकती है जो लोगों का दिल तोड़ देती है। वास्तव में जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर हर किसी का दिल टूटता है और हमारी संस्था वहीं मदद करती है।"

पेशे से समाजशास्त्री वर्धन ने अपने विचार अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए 2008 में एक किताब 'कोपिंग विद ब्रोकन हार्ट्स-वर्ल्ड्स फर्स्ट सेल्फ-हेल्फ बुक फॉर ब्रोकन हार्ट्स' लिखी थी।

वर्धन दावा करते हैं, "मैंने अपने आस-पास ऐसे कई लोगों को देखा जिन्हें या तो जिंदगी में कुछ पाने में असफलता मिली या प्रेम में उनके दिल टूटे, इसी से प्रेरित होकर मैंने 'ब्रोकन हार्ट सोसायटी' बनाई। इन लोगों के लिए किसी ने कुछ नहीं किया था। इसलिए मैंने इस दिशा में काम करना और परामर्श के द्वारा लोगों की मदद करना शुरू कर दिया। यह दुनिया में अपनी तरह की पहली शुरुआत है।"

अब इस सोसायटी में 100 सदस्य हैं जो जिस किसी को भी आवश्यकता होती है उसे निजी तौर पर मिलकर या ई-मेल के जरिए परामर्श देते हैं।

उन्होंने कहा, "कई लोग परामर्श के लिए हमसे संपर्क करते हैं।"

टूटे हुए दिलों के लिए किए गए वर्धन के इस अनोखे प्रयास को 1999 में 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में भी मान्यता मिली।

वर्धन जून में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र पर एक शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए जा रहे हैं। उनका सपना है कि उन्हें नोबेल पुरस्कार मिले।

वह कहते हैं, "मुझे अब तक नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है लेकिन नोबेल पुरस्कार हॉल में मेरी एक किताब का लोकार्पण हुआ है।" वर्धन ने अब तक पांच किताबें और कई शोध पत्र लिखे हैं।

वर्धन के मुताबिक उन्होंने तीन मई 1977 को चण्डीगढ़ में टूटे हुए दिलों के लिए दुनिया का पहला पुनर्वास शिविर आयोजित किया था। उन्होंने तीन मई को 'ब्रोकन हार्ट्स डे' घोषित किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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