देश में कई एयर पोर्ट खतरनाक हैं
कुछ पायलटों का कहना है कि लेह, श्रीनगर, कोझिकोड, बागडोगरा, अगरतला, गुवाहाटी, सिलचर, लेंगपुई, पोर्ट ब्लेयर, कुल्लू और पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित हवाईअड्डे भी ऐसे मुश्किल भरे हैं, जहां लैंडिंग और टेकऑफ के लिए ज्यादा सावधानी और विशेष कौशल की आवश्यकता होती है।
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मद्रास फ्लाइंग क्लब के पदाधिकारी और पायलट, कैप्टन ई.डेनियल का कहना है, "पोर्ट ब्लेयर हवाईअड्डा एकतरफा है। पास में स्थित पहाड़ी के कारण कोई विमान वहां एक तरफ से ही उतर सकता है और उसके विपरीत दिशा में उड़ान भर सकता है। इस तरह दुर्घटना के खतरे बढ़ जाते हैं''
डेनियल के अनुसार केरल के कोझिकोड में स्थित हवाईअड्डा विपरीत मौसम में लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए खतरनाक है, क्योंकि यह पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यहां रनवे के बाद एक खाई है।
भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, "सुरक्षित और असुरक्षित हवाईअड्डा कहने का कोई मतलब नहीं है। किसी हवाईअड्डे को सरल और कठिन कहा जा सकता है। सिर्फ फ्लाइंग और ग्राउंड कंडीशंस सुरक्षित और असुरक्षित होते हैं।"
कमांडर ने कहा, "यह कहना गलत होगा कि दुर्घटनाएं कठिन हवाईअड्डों पर इंतजार करती रहती हैं। अन्य हवाईअड्डों पर भी विमान रनवे से फिसल जाते हैं।" वह बताते हैं कि केरल में कोच्चि का हवाईअड्डा भी किसी समय कठिन हवाईअड्डों में शुमार था।
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अगरतला हवाईअड्डे पर पायलटों के सामने बांग्लादेश के हवाई क्षेत्र में घुस जाने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा, "बागडोगरा हवाईअड्डे के साथ भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां 9,000 फुट का रनवे है। इसके साथ भी नेपाल और बांग्लादेश की सीमाएं लगी हुई हैं।"
लेह का हवाईअड्डा देश में सबसे ऊंचाई पर स्थित है। यह समुद्र तल से 10,682 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई पर न केवल मनुष्य के लिए कठिनाई होती है, बल्कि विमानों के सामान्य संचालन में भी कठिनाई होती है।













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