झामुमो व कांग्रेस के बीच बंद कमरे में बातचीत
भाजपा नेताओं ने सोमवार को झारखण्ड के राज्यपाल एम.ओ.एच.फारुक से मुलाकात की और मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की सरकार से पार्टी के समर्थन वापसी का पत्र उन्हें सौंप दिया।
भाजपा द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के बाद पांच महीने पुरानी सोरेन सरकार अल्पमत में आ गई है। इसके साथ ही राज्य में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई है।
81 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या 18 है और सत्ताधारी झामुमो के सदस्यों की संख्या भी 18 है। गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियों में आल झारखण्ड स्टूडेंट्स युनियन (आजसू) के पांच तथा जनता दल (युनाइटेड) के दो विधायक हैं।
कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के पास 11, राष्ट्रीय जनता दल के पास पांच और बाकी विधायक निर्दलीय या छोटी पार्टियों से हैं। सरकार गठन के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 41 सदस्यों की आवश्यकता होगी।
झामुमो के वरिष्ठ नेता टेकलाल महतो ने सोमवार को नई दिल्ली से लौटने के बाद संवाददाताओं को बताया, "अब हम राज्य में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनाएंगे।" महतो भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनाने के खिलाफ रहे हैं।
महतो, कांग्रेस के लोकसभा सांसद और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री सुबोध कांत सहाय के साथ रांची लौटे।
सहाय ने संवाददाताओं से कहा, "झारखण्ड में एक वैकल्पिक सरकार बनाने का प्रयास किया जाएगा। हमारे केंद्रीय नेता राजनीतिक स्थिति पर कोई निर्णय लेंगे।"
दिल्ली में डेरा डाले कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू ने संवाददाताओं को बताया, "हम राष्ट्रपति शासन के पक्ष में नहीं हैं और झारखण्ड में एक लोकप्रिय सरकार का गठन किया जाना चाहिए।"
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, "विभिन्न स्तर पर कई दौर की बातचीत होगी। कांग्रेस की पहली प्राथमिकता झारखण्ड में वैकल्पिक सरकार का नेतृत्व करना है। सभी प्रमुख पार्टियां इस बात से सहमत हैं कि झारखण्ड में कांग्रेस को सरकार का नेतृत्व करने का एक मौका दिया जाना चाहिए। अब हमारे नेता सरकार का नेतृत्व करना चाहते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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