नक्सली हमले में चार सीआरपीएफ़ जवान मरे

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापोर ज़िले में माओवादियों ने एक बारूदी सुरंग का विस्फोट करके चार सीआरपीएफ़ जवानों को मार दिया है.
ये हमला माओवादियों की ओर से घोषित पांच राज्यों की हड़ताल के दूसरे दिन हुआ है.
राज्य के पुलिस प्रमुख भूपिंदर सिंह ने बीबीसी को बताया कि पश्चिमी मिदनापोर ज़िले में पिंगबोनी और रामगढ़ गांव के बीच सीआरपीएफ़ की गाड़ी को बारूदी सुरंग के विस्फोट से उड़ा दिया गया.
उनका कहना था, “सीआरपीएफ़ के जवान उस इलाके की पैट्रोलिंग कर रहे थे क्योंकि ख़ुफ़िया जानकारी मिली थी कि वहां माओवादी सक्रिय हैं. उसी दौरान वहां ये विस्फोट हुआ.”
माओवादियों की हड़ताल का ये दूसरा और आख़िरी दिन है.
उन्होंने बड़ी विदेशी और भारतीय कंपनियों को खदानों के लाइसेंस आवंटन के तरीके के ख़िलाफ़ इस हड़ताल का आह्वान किया है.
इस धमाके के बाद मावोदियों के प्रवक्ता आज़ाद (उनका वास्तविक नाम नहीं मालूम है) ने बीबीसी को बताया, “हमलोग आदिवासी इलाकों के संसाधनों की लूट नहीं होने देंगे. हमलोग इसके ख़िलाफ़ लड़ते रहेंगे.”
उनका कहना था कि वो सुरक्षाबलों पर तबतक हमला करते रहेंगे जबतक माओवादियों के ख़िलाफ़ चल रहा ऑपरेशन ग्रीनहंट रोका नहीं जाएगा.
आज़ाद का कहना था, “यदि भारत सरकार को लड़ाई चाहिए, तो फिर वही सही.”
इसी हफ़्ते दंतेवाड़ा में माओवादियों ने बारूदी सुरंग के विस्फोट से एक यात्री बस को उड़ा दिया जिसमें कई विशेष पुलिस अधिकारियों समेत 40 से ज़्यादा लोग मारे गए.
उसी इलाके में पिछले महीने माओवादियों ने 70 से ज़्यादा सीआरपीएफड के जवानों को मार दिया था.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माओवादियों को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बताया है.
वहीं गृह मंत्री पी चिदंबरम ने माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान जारी रखने की बात करते हुए कहा है कि वो बातचीत कर सकते हैं यदि माओवादी हिंसा छोड़ दें.












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