प्रभाकरण की मां की अपील खारिज (लीड-1)
श्रीलंका में पिछले वर्ष सैन्य कार्रवाई में मारे गए लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन की 86 वर्षीया मां पार्वती लकवे से पीड़ित हैं और इस समय वह कोलंबो में हैं।
चेन्नई के एक वकील आर. करुप्पन ने यह याचिका दायर की थी।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने इस महीने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार ने इस बात पर सहमति जताई थी कि पार्वती की मां इलाज के लिए भारत आ सकती हैं बशर्ते वह किसी राजनीति समूह से संपर्क न साधे।
पार्वती 16 अप्रैल को कुआलालंपुर से चेन्नई पहुंची थीं लेकिन भारतीय अधिकारियों ने उन्हें उसी विमान से वापस भेज दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि प्रभाकरन की मां या उनके वकील को चेन्नई आने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करना होगा और तमिलनाडु सरकार के पास फिर से जाना होगा।
न्यायाधीश पी. सथशिवम और न्यायाधीश एच. एल. दत्तू की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता वकील करुप्पन से कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देश उनके पक्ष में हैं और इसमें सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप करने लायक कुछ भी नहीं है।
उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल को कहा था कि चेन्नई आने के संबंध में पार्वती और उनके वकील करुप्पन को राज्य सरकार के पास जाना होगा। आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार उसे केंद्र के पास भेजेगी। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने करुप्पन से पूछा कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार क्या वह राज्य सरकार के पास गए।
इस पर करुप्पन का जवाब हां में था। उन्होंने कहा कि इस मामले पर केंद्र सरकार के एक निर्णय का इंतजार है।
लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन को पिछले साल मई में श्रीलंकाई सेना ने मार गिराया था। प्रभाकरन की मौत के बाद उसके माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया था। प्रभाकरन के पिता की मौत के बाद पार्वती को मलेशिया भेज दिया गया था। मलेशिया में काफी संख्या में श्रीलंकाई तमिल रहते हैं। इस समय वह कोलंबो में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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