नए फास्ट ब्रीडर से अगले सितंबर तक तैयार होगी बिजली
चेन्नई, 11 मई (आईएएनएस)। चेन्नई से कोई 80 किलोमीटर दूर कलपक्कम में 5,600 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हो रहे फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में एक और महत्वपूर्ण उपकरण के स्थापित हो जाने के बाद अगले वर्ष सितंबर महीने से 500 मेगावाट क्षमता वाले इस परमाणु विद्युत संयंत्र से बिजली पैदा होने लगेगी।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस सप्ताह स्थापित होने वाले इस पुर्जे का नाम थर्मल बैफल है। यह एक बेलनाकार सुरक्षा पात्र है, जो महत्वपूर्ण उपकरण का हिस्सा होता है। यह संयंत्र में इस्तेमाल किए जाने वाले सोडियम को ठंडा रखने में मदद करता है।
इस विद्युत संयंत्र के परियोजना निदेशक प्रभात कुमार ने आईएएनएस को बताया, "60 टन वजन वाले इस थर्मल बैफल का व्यास कोई 12 मीटर तथा ऊंचाई छह मीटर से अधिक है। यह स्टेनलेस स्टील का बना हुआ है और उम्मीद है कि इसे इसी सप्ताह मुख्य पात्र के अंदर स्थापित कर दिया जाएगा।"
इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा डिजाइन किए गए सोडियम कूल्ड इस फास्ट ब्रीडर में कुल तीन पात्र हैं। पहला सुरक्षा पात्र, दूसरा मुख्य पात्र और तीसरा आंतरिक पात्र। ये सभी पात्र रिएक्टर को ठंडा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य पात्र में स्थापित होने वाला बैफल भी स्टेनलेस स्टील का बना हुआ है। इसका वजन 200 टन है। इसमें भी ठंडा करने वाला द्रव सोडियम भरा होगा। रिएक्टर के गर्भ में ईधन और परमाणु विद्युत उत्पादन के लिए जरूरी अन्य उपकरण स्थापित होंगे।
आईजीसीएआर के सहयोगी डिजाइन निदेशक पी.चेल्लापांडी ने कहा, "थर्मल बैफल आंतरिक पात्र से होने वाले विकिरण के विरुद्ध बफर दीवार का काम करता है। आंतरिक पात्र में 550 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सोडियम द्रव भरा होता है। यह मुख्य पात्र में 400 डिग्री सेल्सियस के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है।"
अधिकारियों ने कहा है कि भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा तैयार किया जा रहा यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर, देश के त्रिस्तरीय परमाणु विद्युत कार्यक्रम की एक प्रमुख परियोजना है। भारत 1985 में ही इस तरह की प्रौद्योगिकी वाला दुनिया का छठा देश बन चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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