रेड्डी बंधुओं को खनन की इजाजत मिली (लीड-1)

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि खनन संबंधी गतिविधि कर्नाटक की सीमा से 150 किलोमीटर दूर होगी और विवादित क्षेत्र में खनन कार्य नहीं होगा।

प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति दीपक वर्मा और न्यायमूर्ति बी.एस.चौहान की खण्डपीठ ने कहा कि रेड्डी बंधुओं की ओबुलापुरम माइंनिंग कंपनी (ओएमसी) सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा अदालत को सौंपे गए नक्शे के अनुसार खनन कार्य संचालित करेगी।

अदालत ने सर्वे ऑफ इंडिया से कहा है कि वह छह खनन पट्टों के सीमांकन कार्य को दो महीनों के भीतर पूरा करे।

सर्वे ऑफ इंडिया ने सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी अपनी पहले की रिपोर्ट में कहा था कि इलाके में कार्यरत छह खनन पट्टों के फिर से सीमांकन की आवश्यकता है। इलाके में स्थिन इन छह खनन पट्टों में से तीन पट्टे रेड्डी बंधुओं के हैं।

पिछले सप्ताह न्यायालय ने बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

न्यायमूर्ति वर्मा द्वारा लिखे गए आदेश में कहा गया है कि ओएमसी अपने खनन कार्य को उस समय उसी स्थिति में बंद कर देगा, जब सर्वे ऑफ इंडिया इलाके के सीमांकन और नक्शा तैयार करने का काम शुरू करेगा।

आदेश में कर्नाटक सरकार से भी कहा गया है कि वह आंध्र प्रदेश से लगी सीमा पर अपने विवादित इलाके की घेरेबंदी कर दे।

उल्लेखनीय है कि तीनों रेड्डी बंधु जी. करुणाकर रेड्डी, जी. जनार्दन रेड्डी और जी. सोमा शेखर रेड्डी राजनीतिक तौर पर बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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