मुकदमेबाजी पर बढ़ते खर्च पर प्रधानमंत्री ने जताई चिंता (लीड-1)
उन्होंने कानून बिरादरी से अपील भी की कि वे सिर्फ अदालतों और मुवक्किलों के मामले निपटाने तक ही खुद को सीमित न रखें, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी भूमिका निर्वाह करें।
बार एसोसिएशन द्वारा 'कानून और शासन' विषय पर आयोजित स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर कानून बिरादरी के नुमाइंदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "न्याय में देरी का मतलब न्याय न मिलना होता है। इसलिए अदालतों में लंबित पड़े मामलों को निपटाने और न्याय को सर्वसुलभ बनाने की दिशा में बार एसोसिएशन, न्यायपालिका और सरकार को केंद्रित प्रयास करने होंगे।"
उन्होंने आम आदमी को सुलभ कानूनी सहायता न मिलने पर भी चिंता जताई और कहा कि कानूनी मामलों में होने वाला खर्च जब तक आम आदमी की पहुंच में नहीं होगा तब तक न्यायिक समानता की अवधारणा अधूरी रहेगी।
सिंह ने कहा, "कानून बिरादरी की भूमिका सिर्फ अदालतों और अपने मुवक्किलों के मामले निपटाने तक सीमित नहीं है। उन्हें न्याय प्रशासन का अभिन्न अंग बने रहने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए।"
उन्होंने कहा, "इस बिरादरी के सदस्यों ने पूर्व में इन क्षेत्रों में ऐतिहासिक योगदान दिया है। चाहे वह आजादी की लड़ाई हो या संविधान का निर्माण या फिर सरकार की कार्यप्रणाली हो। यहां तक कि आज भी उनके मंत्रिमंडल में इस बिरादरी के कई प्रमुख लोग शामिल हैं।"
सिंह ने कहा, "जन कल्याण और राष्ट्रीय हित में कानून बिरादरी अहम भूमिका निभा सकती है।" लातूर और भुज में आए भूकंप और सुनामी तथा कारगिल युद्ध के दौरान बार एसोसिएशन की ओर से किए गए योगदानों के लिए सिंह ने उसकी सराहना भी की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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