हिमाचल की पहाड़ियों पर आग लगने की घटनाएं बढ़ीं
विशाल गुलाटी
शिमला, 1 मई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के वन क्षेत्रों और घास के मैदानों में गर्मी के मौसम में आग लगना कोई नई बात नहीं हैं लेकिन इस साल लंबे समय तक गर्मी के असर से इन घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। केवल अप्रैल में ही आग लगने की 400 से ज्यादा घटनाएं सामने आईं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक खिंची सूखी गर्मी से खासकर निचले और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
मुख्य संरक्षक (वन संरक्षण एवं अग्नि नियंत्रण) अवतार सिंह ने आईएएनएस से कहा, "तापमान में असामान्य वृद्धि और लंबी अवधि का सूखा जंगलों के लिए खतरा बन गया है। अप्रैल में करीब 5,177 हेक्टेयर जंगल अग्निकांड की चपेट में आए।"
उन्होंने बताया कि एक अप्रैल से 28 अप्रैल तक आग लगने की 432 घटनाओं में 53,44,156 रुपये का नुकसान हो चुका है। वर्ष 2009-2010 के दौरान आग लगने की 1906 घटनाओं में करीब 24,849 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल गया।
सिंह के अनुसार राज्य में बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर, सोलन, मंडी और शिमला जिलों के वनक्षेत्र अग्निकांड से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
शिमला में मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह कहते हैं कि मार्च में अधिकतम तापमान सामान्य से छह से सात डिग्री सेल्सियस और अप्रैल में यह आठ से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। मिट्टी में नमी की कमी भी जंगलों में आग लगने का कारण बनी।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य का 22 फीसदी वन क्षेत्र आग लगने के लिहाज से संवेदनशील है। आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं देवदार के जंगलों में हुईं क्योंकि इनमें तारपीन का तेल पाया जाता है जो आग लगने के खतरे को बढ़ाता है। देवदार के जंगल 5,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications