मनमोहन सोमवार को करजई से मिलेंगे (लीड-1)

सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने रात्रिभोज पर रसूल से मुलाकात की और तालिबान के साथ सत्ता में भागीदारी की किसी भी व्यवस्था के परिणामों के बारे में नई दिल्ली की असहमति से उन्हें अवगत कराया।

सूत्रों ने कहा कि भारत ने अच्छे तालिबान और बुरे तालिबान के बीच किसी भी कृत्रिम भेद का हमेशा से विरोध किया है और वह सत्ता में भागीदारी के किसी भी समझौते को अपने हितों के लिए तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानता है।

रसूल ने भारत को कबायली नेताओं की एक बैठक 'शांति जिरगा' के बारे में जानकारी दी, जो करजई के वाशिंगटन से लौटने के बाद अगले महीने आयोजित हो सकती है।

लंदन में 28 जनवरी के सम्मेलन में अफगानिस्तान में तालिबान से सुलह का रास्ता साफ होने के बाद से ही भारत कई बार प्रस्तावित सत्ता साझेदारी का विरोध कर चुका है।

मनमोहन सिंह सोमवार को जब करजई से मिलेंगे तो वह सत्ता में तालिबान को साझेदार बनाने के खतरों के बारे में उन्हें आगाह कर सकते हैं। भारत का मानना है कि तालिबान का सत्ता में शामिल होना न केवल उसके हितों के खिलाफ है बल्कि अफगानिस्तान में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता हासिल करने के लिए भी खतरा है।

करजई राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से भी मुलाकात करेंगे और उसके बाद वह भूटान की राजधानी थिंपू के लिए मंगलवार को रवाना हो जाएंगे। वहां वह दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) की 16वीं शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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