मणिपुर में संपत्ति खरीद-फ़रोख़्त पर रोक

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
मणिपुर में संपत्ति की खरीद-फ़रोख्त पर पाबंदी लगा दी गई है और इसे एक असाधारण क़दम के तौर पर देखा जा रहा है.
ये फ़ैसला तुरंत लागू हो गया है और अगले नोटिस तक लागू रहेगा.
मुख्यमंत्री ओक्रम इबोबी सिंह ने कहा कि ये पाबंदी खरीदी और बेची गई संपत्ति के पंजीकरण पर भी लागू होगी.
उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला पक्की खुफ़िया रिपोर्टों के मिलने के बाद लिया गया.
रिपोर्टों के मुताबिक देश के दूसरे हिस्सों से आए कई लोग अपनी ज़मीन और संपत्ति बेचकर पलायन कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “इस बात की आशंका है कि कई ग़ैर-मणिपुरी लोगों को अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है. हमें शक है कि बड़ी संख्या में लोगों पर दबाव डाला जा रहा है.”
जाँच
ओक्रम इबोबी सिंह ने कहा कि उनके मंत्री परिषद ने फ़ैसला किया है कि मणिपुर की राजधानी इंफ़ाल में पिछले 10 सालों में किए गए संपत्ति के पंजीकरण की जाँच शुरू की जाए.
उन्होंने कहा कि हर सौदे की पृष्ठभूमि की जाँच की जाएगी ताकि ये पता लगाया जा सके कि खरीदारी के लिए इस्तेमाल किए गए पैसे कहाँ से आए.
मणिपुर पुलिस के खुफ़िया विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें शक है कि भूमिगत हुए बागी नेता और उनके करीबी लोग ग़ैर-मणिपुरी लोगों को भगा कर उनकी संपत्ति कौड़ियों के दाम पर खरीद रहे हैं.
एक ग़ैर-सरकारी वेबसाइट साउथ एशिया टेररिज़्म पोर्टल के मुताबिक मणिपुर भारत के उत्तर-पूर्व का सबसे हिंसात्मक प्रदेश है और वर्ष 2009 में अलगाववादी विद्रोहियों से जुड़ी घटनाओं में करीब 400 लोगों की मौत की रिपोर्टें आई थी.
मणिपुर में दर्जन भर से ज़्यादा विद्रोही संगठन सक्रिय हैं.
उल्फ़ा और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जैसे संगठनों का बर्मा की सीमा से लगे इलाकों में नियंत्रण है और उन्हें वहाँ से हटाने की सैन्य कोशिशें विफल रही हैं.
पिछले कुछ समय से विद्रोहियों ने भारत के दूसरे हिस्सों से आए लोगों, खासकर हिंदी बोलने वालों पर हमले तेज़ कर दिए हैं.












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