चिदम्बरम रक्सौल एकीकृत जांच चौकी की आधारशिला रखेंगे

भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर एकीकृत जांच चौकियां बनाना भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जो 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 635 करोड़ रुपये के प्रारंभिक परिव्यय के साथ शुरू की गई है। रक्सौल एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) बिहार में पहली आईसीपी और अटारी आईसीपी के बाद देश में दूसरी आईसीपी है। अटारी आईसीपी पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। परियोजना की अनुमानित लागत 120 करोड़ रुपये है। रक्सौल में आईसीपी लगभग 254 एकड़ भूमि पर बनाई जाएगी। आशा है कि यह चौकी जून 2011 तक बन कर तैयार हो जाएगी।

भारत नेपाल सीमा के साथ-साथ तीन और आईसीपी बनाई जाएंगी। इनमें से एक बिहार में जोगबानी में और अन्य दो चौकियां उत्तर प्रदेश मे रूपैरिहा और सुनौली में होंगी।

आईसीपी बनाने का उद्देश्य देश की भू-सीमाओं पर विभिन्न प्रवेश और निकासी बिंदुओं पर ढांचागत बाधाओं को दूर करना है।

देश में एक भू-बंदरगाह प्राधिकरण (एलपीएआई) स्थापित करने के लिए संसद में एक विधेयक पेश किया गया है। इसे इन आईसीपी (ज) के आयोजन, निर्माण, रखरखाव और प्रबंधन के लिए वैधानिक निकाय के रूप में परिकल्पित किया गया है। इस निकाय को भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण जैसी समान निकायों की तर्ज पर अधिकारों से लैस किया गया है। जब तक एलपीएआई अस्तित्व में नहीं आती तब तक सचिव (सीमा प्रबंधन) के तत्वावधान में गठित संचालन समिति इन कार्यों का निष्पादन करेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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