बढ़ रहा है गुर्जर आंदोलनकारियों का जोश
बढ़ते हौसले
इसी तरह जयपुर-दिल्ली राजमार्ग पर कोटपूतली में भी गुर्जरों का महापड़ाव जारी है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 पर दौसा से महुआ तक सन्नाटा पसरा हुआ है। कस्बे में बाजार बंद हैं। लेकिन 42 डिग्री सेल्सियस के तापमान, प्रचंड धूप और धूल भरी आंधियां के बीच पड़ाव डाले गुर्जरों के हौसले को कम नहीं हो रहे हैं।
सिकंदरा चौराहे पर गुर्जरों का ठहराव बढ़ने के साथ ही उनका जोश भी बढ़ता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि गुर्जरों के इस आंदोलन का नेतृत्व कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला कर रहे हैं। बैंसला और सरकार के बीच हुई वार्ता का अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं आया है। बैंसला अपनी मांग पर अड़े हैं वहीं सरकार 5% आरक्षण देने का जोखिम भरा निर्णय लेना नहीं चाहती। धीरे-धीरे आंदोलनकारियों का जोश कम होने के बजाय बढ़ रहा है। आंदोलनकारियों ने राजमार्ग पर रेलिंग और डिवाइडरों को भी तोड़ दिया है। जयपुर की ओर से आगरा आने-जाने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक रास्तों के जरिये ही निकाला जा रहा है।
मजदूरों के सामने संकट
सिकंदरा चौराहे पर जिले के अलावा हिण्डौन और करोली डांग क्षेत्र के गुर्जर भी भारी तादाद में मौजूद हैं। ऐसे में चौराहे पर स्थित बाजार में बाहर पड़े सामानों और दुकानों को किसी प्रकार का नुकसान न हो इसके लिए स्थानीय गुर्जर समाज के लोग सतर्क हैं। आंदोलनकारी युवकों ने बुधवार को दिन में करीब 11 बजे सिंकदरा गांव में प्रवेश किया और चाय-पान की दुकानों को भी बंद करा दिया। युवकों के इस तरह गांव में घुस कर बाजार बंद कराने से वहां के ग्रामीण काफी डर गये हैं।
इस आंदोलन से सबसे ज्यादा नुकसान निचले तबके के लोगों का हो रहा है। सिकंदरा चौराहे पर स्थित नक्काशी के छोटे कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के सामने आजीविका की समस्या खड़ी हो गयी है। इस इलाके में पत्थर पर नक्काशी करने वाले अधिकतर छोटे-बड़े कारखाने आंदोलन की वजह से बंद हो गए हैं। जिससे यहां काम करने वाले कामगारों को अब अपने लिए कोई रास्ता नहीं समझ आ रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग के आंदोलनकारियों द्वारा बाधित होने से वाहनों की आवाजाही बंद है जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।













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