गुर्जरों के महापड़ाव ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ाई

सिकंदरा के बाद महरावर महापड़ाव में पहले रोज ही बड़ी तादाद में आस पास के गांवों से गुर्जर शामिल हुए। पुलिस प्रशासन के लिए पड़ाव चिंता का सबब बना हुआ है। दरअसल यह पड़ाव जिस स्थान पर डाला गया है वह पीलूपुरा गांव से महज ढाई किलोमीटर दूर है।

पीलूपुरा गांव गुर्जरों के पिछले आंदोलन की सबसे खतरनाक जगहों में से एक है जो जयपुर-मुंबई रेलवे ट्रैक और जयपुर आगरा हाईवे से कुछ ही दूरी पर है। पिछले आंदोलन के दौरान गुर्जरों ने इस रेल पटरी और हाईवे पर कब्जा कर देश के एक बड़े हिस्से में सड़क और रेल यातायात को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया था।

राज्य सरकार के साथ कई दौर की वार्ताओं के बाद भी राज्य सरकार गुर्जरों की मांगों का समाधान नहीं निकाल पा रही है। गुर्जरों ने सरकार पर दवाब बढ़ाने के मकसद से ही पीलूपुरा गांव के पास महापड़ाव शुरू किया है।

इस बीच, राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर गुर्जरों की मांगों और आंदोलन की स्थिति पर विचार करने के लिए गठित जस्टिस इसरानी कमेटी ने काम शुरू कर दिया है। कमेटी ने गुरुवार को कानूनी पहलुओं पर सुनवाई के लिए कार्मिक और विधि विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई है। समिति शुक्रवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा गृह विभाग के अधिकारियों से इस मुद्दे पर चर्चा करेगी और 24 अप्रैल को यह समिति गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का पक्ष सुनेगी।

उधर, दौसा जिले के सिकंदरा कस्बे में गुर्जरों का बेमियादी महापड़ाव गुरुवार को भी जारी रहा। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने गुरुवार को भी गांवों का दौरा कर गुर्जरों से महापड़ावों में पहुंचने की अपील की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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