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डॉक्टर्स की कमी से त्रस्त बिहार, झारखण्ड

नई दिल्ली। बीमारू राज्यों की क्षेणी में टॉप पर आने वाले राज्य बिहार और झारखण्ड जैसे राज्यों में डॉक्टर्स की भारी कमी है। इन दोनों राज्य के सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों में डॉक्टर्स की भारी कमी है। जिसका खामियाजा यहां की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

वासा ऐसा नहीं हा कि इन राज्यों की सरकारें इस समस्या से वाकिफ नहीं हैं या इसके समाधान के लिए प्रयासरत नहीं हैं। दोनों ही राज्यों में भारी संख्या में चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इन सभी डॉक्टर्स की नियुक्तियां अनुबंध पर आधारित हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने हाल ही में राज्यसभा में कुछ आंकड़े पेश किए। बिहार के सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों में 176 और झारखण्ड में 736 स्पेश्लिस्ट डॉक्टर्स की कमी है। बिहार में प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में 76 चिकित्सकों, 706 नर्सो तथा 1259 स्टाफ नर्सो की कमी है। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 381 विशेषज्ञ चिकित्सकों और 3000 स्टाफ नर्सो को जबकि झारखण्ड में 19 विशेषज्ञों चिकित्सकों और 407 स्टाफ नर्सो को अनुबंध के आधार पर रखा गया है। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि बिहार और झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवाओं में बेहद पिछड़े हैं।

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