• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

गढ़वाल विश्वविद्यालय में 7.5 करोड़ रुपये का घोटाला

By Staff
|

विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने 14 अप्रैल को जारी अपने आदेश में इस जांच कमेटी के दो सदस्य नामित किए हैं इसमें पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर आऱ पी़ शर्मा एवं भूगर्भ विज्ञान विभाग के डा़ एम़ पी़ एस़ बिष्ट को सदस्य बनाया गया है।

यह घोटाला श्रीनगर की एक संस्था सोसायटी फॉर रेग्युलेशन अंगेस्ट करप्शन के सूचना के अधिकार के तहत ली गई जानकारी से उजागर हुआ है। इस संस्था को मिली सूचना के अनुसार वर्ष 2002 से 2008 के बीच तकरीबन 7़ 5 करोड़ रुपये मूल्य के जो फार्म व्यक्तिगत परीक्षाओं के बेचे गए उनसे प्राप्त धनराशि विश्वविद्यालय कोष में जमा नहीं हुई।

इस संबंध में यह कहा जा रहा है कि विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग द्वारा जो फार्म विश्वविद्यालय के पूरे गढ़वाल क्षेत्र में मौजूद लगभग 75 केन्द्रों के बिक्री हेतु उपलब्ध कराए गए उनके द्वारा इन्हें बेचने के बावजूद इनसे संग्रहीत धनराशि विश्वविद्यालय कोष में जमा नहीं की गई।

सूचना के अधिकार के तहत ली गई जानकारी में बताया गया है कि वर्ष 2002 व 2003 में स्नातक परीक्षा के लिए जहां 29,846 फार्मो की बिक्री का पैसा ही विश्वविद्यालय कोष में जमा हुआ वहीं इस वर्ष विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्यक्तिगत परीक्षा में छात्रों की संख्या 34,478 रही।

इसी तरह 2006-2007 में परास्नातक कक्षाओं के व्यक्तिगत फार्मों की बिक्री 14,081 रही, तो परीक्षा देने वाले कुल छात्र छात्राओं की संख्या 15,533 रही। इसी प्रकार 2002 से 2008 तक हर साल परीक्षा देने वालों एवं फार्म बिक्री कर विश्वविद्यालय कोष में जमा किए जाने वाले फार्मो की संख्या में भारी अंतर दर्ज हुआ है। इसका कारण विश्वविद्यालय के सूत्र यहां से 75 केन्द्रों में बिक्री किए गए फार्मो का पैसा विश्वविद्यालय कोष में जमा न किए जाने को ही बता रहे हैं।

इस विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताएं पूर्व में भी उजागर होती रही हैं। विश्वविद्यालय के कई शिक्षक विश्वविद्यालय से एडवांस लेकर उन्हें वर्षो तक जमा न कराए जाने के मामले में भी पूर्व में सुर्खियों में आ चुके हैं। कई विभागों के क्रियाकलापों के लिए एडवांस लिए गए पैसे का हिसाब समय पर न दिए जाने से भी भारी वित्तीय अनियमितता से विश्वविद्यालय गुजरता रहा है।

इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा़ यू.एस. रावत का कहना है कि इस मामले की जांच के बाद ही इसकी सही तस्वीर सामने आएगी। रावत के अनुसार प्राइवेट संस्थानों से फार्म के पूरे पैसों को जमा कराने के वक्त संस्थानों द्वारा अपनी कंटेजेन्सी एवं अन्य खचरें की भी कटौती इससे दी जा सकती है। इसलिए इसमें कुछ अंतर आना संभव है तथापि बिना जांच के क्या हुआ होगा, कहना मुश्किल है।

रावत ने कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद ही इसका ठीक ठाक अंदाज लग सकेगा कि यह घोटाला आखिर क्या है। कुलसचिव के अनुसार यह मामला उस वक्त का है जबकि यह विश्वविद्यालय राज्य के अर्न्तगत था। केन्द्रीय विश्वविद्यालय को इससे कोई लेना देना नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more