बिगबेल की तर्ज पर मसूरी घंटाघर का निर्माण (फोटो सहित)
मसूरी, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। मसूरी में 72 वर्ष पूर्व बने घंटाघर को तोड़कर उसकी जगह लंदन के बिग बेल की तर्ज पर नए घंटाघर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
इस घंटाघर का निर्माण 1938 में अंग्रेजों ने कराया था। इस ऐतिहासिक घंटाघर को तोड़कर अब नया घंटा घर बनाया जा रहा है। इस पर 40 लाख रुपए की लागत आने वाली है। मसूरी के प्रसिद्घ लंढौर बाजार में स्थित पुराना घंटाघर जर्जर हो गया था।
घंटाघर को आकर्षक बनाने के लिए नगरपालिका ने इसके कायाकल्प का निर्णय लिया है। पालिका अध्यक्ष ओ़ पी़ उनियाल के अनुसार इस घंटाघर को लंदन के बिग बेल की तर्ज पर आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा।
नगर के प्रमुख व्यापारी संजय नारंग ने घंटाघर के लिए मदद की पेशकश की है। घंटाघर के निर्माण पर आने वाले खर्च में से 19 लाख रुपये की राशि मसूरी नगरपालिका द्वारा और शेष राशि नारंग द्वारा लगाई जाएगी।
नारंग प्रख्यात क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के मित्र हैं। सचिन जब भी मसूरी आते हैं नारंग के घर ठहरते हैं।
पालिका अध्यक्ष के अनुसार पुराने घंटाघर से नए घंटाघर की चौड़ाई कम कर दी गई है। ऐसा यातायात व्यवस्था कसे ध्यान में रखते हुए किया गया है। मसूरी में प्रख्यात लेखक रस्किन बांड का भी घर है।
नए घंटाघर को तीन मंजिला बनाया जाएगा। पहले माले पर डिस्पेंसरी रहेगी, दूसरे माले पर राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय इतिहासकारों व लेखकों की पुस्तकों की लाइब्रेरी बनेगी। तीसरे माले को पर्यटकों के लिए रखा जाएगा।
इस नवनिर्माण को लेकर मसूरी के व्यापारी भी खासे उत्साहित हैं। व्यापारियों का कहना है कि इससे मसूरी का आकर्षण बढ़ जाएगा। लाइब्रेरी व डिस्पेंसरी का स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। नए घंटाघर से यातायात व्यवस्था में भी सहूलियत हो जाएगी।
देश की पहली नगरपालिका होने का गौरव प्राप्त करने वाला मसूरी शहर अंग्रेजों द्वारा योजनागत ढंग से बसाया गया था। इस शहर में आज भी कई ऐसी इमारतें एवं अवशेष हैं, जो ब्रितानी स्थापत्य का बेजोड़ नमूना हैं। देश के आईएएस अफसरों को प्रशिक्षित करने वाली आईएएस अकादमी, लाल बहादुरशास्त्री प्रशासनिक अकादमी भी इसी शहर में मौजूद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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