ईरान के पास विकसित सेंट्रीफ्यूज़

Iran
ईरान का कहना है कि उन्होंने ऐसा सेट्रीफ्यूज़ विकसित किया है जिससे यूरेनियम का संवर्धन छह गुना कारगर तरीके से संभव हो सकेगा. ईरान ने अपने परमाणु दिवस के दौरान अपनी आणविक उपलब्धियों का प्रदर्शन किया और पश्चिमी देशों को जता दिया कि उसे कमज़ोर न समझा जाए.

इस मौके पर ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने यूरेनियम का संवर्धन करनेवाले सेंट्रीफ्यूज के एक नए मॉडल का अनावरण किया. सामने से ये सेंट्रीफ्यूज एक साधारण स्टील सिलेंडर की तरह नज़र आ रहा था लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख अली अकबर सालेही के मुताबिक इस नए सेंट्रीफ्यूज की मदद से ईरान छह गुना ज्यादा कारगर तरीके से यूरेनियम का संवर्धन करने में सक्षम हो जाएगा.

ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने कहा, ' ईरान की उपलब्धियों पर नज़र डालिए.नातांज़ परमाणु संयंत्र में साठ हजार सेंट्रीफ्यूज लगाए जा रहे हैं.पहली पीढ़ी के ये सेंट्रीफ्यूज एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र को एक साल तक ईंधन मुहैय्या करा सकते हैं लेकिन अगर हम पहली पीढ़ी के इन सेंट्रीफ्यूज की जगह नए सेंट्रीफ्यूज का इस्तेमाल करते हैं जिनका उत्पादन पूरी तरह ईरान में ही हुआ है तो हम साठ हजार सेंट्रीफ्यूज की मदद से छह परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को ईंधन मुहैय्या करा सकेंगे.''

लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिम की चिंता ये है कि इस नए सेंट्रीफ्यूज से ईरान के परमाणु बम निर्माण कार्यक्रम में और तेज़ी आएगी. हालांकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है लेकिन पश्चिमी देश ईरान के इरादों पर यकीन नहीं कर पा रहे और उस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए अमरीका के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दबाव बनाने की कोशिशें की जा रही हैं.

उधर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पूर्व प्रमुख अल बारादेई का मानना है कि ईरान पर नए प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए. उनका कहना है कि प्रतिबंधों से कट्टरपंथियों की ताकत बढ़ती है लेकिन आम गरीब जनता की परेशानी बढ़ती है. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ तुरंत कोई कार्रवाई करने से पहले थोड़ा और इंतजार करना चाहिए. मिश्र में आजकल राजनीतिक बदलाव लाने की मुहिम चला रहे बरादेई ने ये भी कहा कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की प्रस्तावित अमरीका यात्रा के स्थगन को भी वो ठीक नहीं मानते.

नेतान्याहू को अगले हफ्ते वॉशिंगटन में होनेवाले परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेना था लेकिन जानकारों का मानना है कि सम्मेलन में मिश्र और तुर्की द्वारा इस्राइल के परमाणु हथियारों का मुद्दा उठाए जाने के डर से ही नेतान्येहू ने अपनी अमरीका यात्रा स्थगित कर दी है. अल बारादेई ने कहा कि इस्राइल अपने परमाणु हथियारों को लेकर दुनिया को ज्यादा अंधेरे में नहीं रख सकता.

उनका कहना था, ''अरब देश आज परमाणु हथियारों के मामले में इस्राइल को मिली छूट से परेशान और आहत हैं. इस्राइल के पास भारी मात्रा में परमाणु हथियार हैं लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती जबकि बाकी देशों से कहा जाता है कि वे परमाणु ऊर्जा के बारे में सोचें भी नहीं। सुरक्षा के नाम पर इस्राइल को जो सहूलियतें दी जा रही हैं वही दूसरे देशों की असुरक्षा की सबसे बड़ी वजह हैं.""

नेतान्याहू के परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने के फैसले के बारे में अमरीका का कहना है कि इस्राइल नहीं चाहता कि मध्यपूर्व के देश उसके परमाणु हथियारों का मुद्दा सम्मेलन में उठाएं. अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेम्स जोन्स ने कहा कि अगर इस्राइल सम्मेलन में हिस्सा लेता है तो हो सकता है कि अरब देशों के दबाव में सम्मेलन का एजेंडा ही बदल जाए. इस्राइल इस स्थिति से बचना चाहता है. तथ्य ये है कि इस्राइल ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कभी भी ये घोषित नहीं किया कि उसके पास परमाणु हथियार हैं या नहीं लेकिन मध्यपूर्व के देश हमेशा से उसे संदेश की निगाह से देखते रहे हैं.

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