बग़दाद में घातक धमाके

इराक़ की राजधानी बग़दाद में एक के बाद एक तीन धमाके हुए, जिसमें कम से कम 30 लोग मारे गए हैं.
इन धमाकों में 160 लोग घायल हुए हैं. ऐसा लगता है कि इन धमाकों का मक़सद विदेशी दूतावासों को निशाना बनाना था.
एक बम विस्फोट ईरानी दूतावास के बिल्कुल क़रीब हुआ. दो अन्य धमाके शहर के मध्य-पश्चिमी ज़िले मनसौर में हुए, जिनमें मिस्र और जर्मनी के दूतावास प्रभावित हुए.
एक बम धमाका ईरान समर्थक राजनेता अहमद चलाबी के दफ़्तर के पास हुआ.
इन धमाकों के कारणों का पता नहीं चला है, लेकिन इन धमाकों ने पिछले महीने हुए चुनाव के बाद के शांत वातावरण में तहलका मचा दिया है.
अभी तक किसी ने धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल तक पहुंची, तो बंदूक़ की आवाज़े सुनाई पड़ रही थीं.
दो दिन पहले बग़दाद के पास एक गांव में हुए हमले में कम से कम 25 सुन्नी मारे गए थे.
बीबीसी के संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि बग़दाद में ये बम धमाके एक के बाद एक कम अंतराल पर हुए, जिनसे मध्य बग़दाद का पूरा इलाक़ा हिल गया और आसमान धुएं से भर गया.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विद्रोही दुनिया को ये पैग़ाम देना चाहते हैं कि इराक़ अब भी असंतुलित है.
अहमद चलाबी राजनीतिक गुट इराक़ी नेशनल कांग्रेस के एक प्रवक्ता का कहना है कि सीरिया के दूतावास के पास उनके मुख्यालय को एक आत्मघाती कार बम से निशाना बनाया गया है, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी और अन्य कर्मचारी मारे गए हैं.
इराक़ में इसी प्रकार के तीन हमले जनवरी में हुए थे जिनमें एक बड़ा होटल निशाने पर था. पिछले साल अगस्त, अक्तूबर और दिसंबर के महीनों में काफ़ी बड़े धमाके हुए, जिनमें सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया था और सैंकड़ों लोग मारे गए थे.












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