उड़ीसा में नक्सली हमले में 10 जवान शहीद (लीड-3)

पुलिस के उप महानिरीक्षक संजीब पांडा ने आईएएनएस को बताया कि नक्सलियों ने बायपारीगुडा कस्बे से 14 किलोमीटर दूर उस समय एक बारूदी सुरंग विस्फोट किया जब बड़ी संख्या विशेष अभियान समूह (एसओजी) के सुरक्षाकर्मी तीन वाहनों में सवार होकर वहां से गुजर रहे थे।

विस्फोट में एक बस पूरी तरह तहस-नहस हो गई।

पांडा ने बताया, "नक्सलियों ने एक बस को विस्फोट से उड़ा दिया। वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। कम से कम 10 सुरक्षाकर्मियों के मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों की संख्या में बढ़ सकती है।"

इस हमले में कम से कम नौ पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं।

विस्फोट काफी शक्तिशाली था जिसकारण बस करीब 50 फुट ऊपर तक उड़ गई। विस्फोट के कारण करीब 10 फुट गहरा गड्ढा हो गया।

हमले की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे कायराना हरकत करार दिया है।

पटनायक ने कहा, "यह कायर और डरपोक हरकत है। हमारे जवान नक्सलियों से निपटने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं।"

मुख्यमंत्री ने शहीद जवानों के परिवजनों को आठ लाख के मुआवजे, 10 लाख रुपये का बीमा और एक व्यक्ति को नौकरी देने की घोषणा की।

राज्य का आधे से अधिक हिस्सा नक्सल प्रभावित है। राजधानी भुवनेश्वर से करीब 500 किलोमीटर दूरी पर स्थित कोरापुट जिले को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।

नक्सलियों का दावा है कि वे गरीबों, वंचितों और समाज के उपेक्षित वर्गो के लिए लड़ रहे हैं और अक्सर जमींदारों और ठेकेदारों पर हमले करते हैं। नक्सली राज्य में पुलिस, सरकारी प्रतिष्ठानों और उद्योगों को लगातार निशाना बना रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2001 से 2009 के बीच नक्सली हमले में कम से कम 145 पुलिसकर्मी और 93 आम नागरिक मारे जा चुके हैं। दूसरी तरफ पुलिस कार्रवाई में इस दौरान केवल 61 नक्सली मारे गए हैं।

राज्य के उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमोत्तर हिस्सों में नक्सली गतिविधियां सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

इंडो-एशियन न्यूज सíवस।

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