वयोवृद्घ मार्क्सवादी नेता अनंत लागू नहीं रहे
अनंत लागू के करीबी कैलाश कोठारी ने आईएएनएस को बताया, "अनंत लागू को शनिवार को स्वास्थ्य बिगड़ने पर ग्रेटर कैलाश चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने लगभग पांच बजे अंतिम सांस ली। लागू का अंतिम संस्कार रविवार को पलासिया स्थित श्मसान घाट पर किया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा शाम चार बजे शहीद स्मारक से शुरू होगी।"
पार्टी सूत्रों के अनुसार लागू ने अपनी राजनीतिक यात्रा ग्वालियर से स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता के रूप में शुरू की थी और बाद में इंदौर आकर उन्होंने कम्युनिस्ट आंदोलन की नींव रखी। लागू ने ही होमी दाजी को कम्युनिस्ट पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। इंदौर मे गठित होने वाले हर श्रमिक संगठन में लागू ने अहम भूमिका निभाई। इसलिए उन्हें श्रमिक आंदोलनों का जनक माना जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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