'गोवा जल मार्गो से और लौह अयस्क ढुलाई संभव नहीं'

गोवा स्थित मोरमुगाव बंदरगाह के (एमपीटी) के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें पूछा गया था कि क्या एमपीटी 10 करोड़ टन लौह अयस्क की परियोजना को वहन कर पाने की स्थिति में होगा, जैसा कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 100 अतिरिक्त खदानों को अपनी मंजूरी दे रखी है। इससे राज्य की खनन क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी।

अग्रवाल ने कहा, "हम (एमपीटी) तो इसे वहन कर लेंगे, लेकिन मुझे नहीं पता कि गोवा के जल मार्ग इसे वहन कर पाएंगे या नहीं। खनन क्षमता में बढ़ोतरी होने से लौह अयस्क की ढुलाई में बढ़ोतरी नहीं होने वाली।"

गोवा के जंगली इलाकों में स्थित खुली खदानों से निकलने वाले लाखों टन लौह अयस्क और मैग्नीज अयस्क को विशाल परिवहन पोतों तक घरेलू स्तर पर निर्मित नौकाओं के जरिए दो नदियों (मंडोवी और जुआरी) के रास्ते पहुंचाया जाता है।

नौकाओं द्वारा विशाल पोतों तक अयस्क पहुंच जाने के बाद ये पोत चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और रोमानिया जैसे देशों के लिए रवाना हो जाते हैं। ये देश गोवा के निम्न दर्जे के लौह अयस्क के प्रमुख आयातक हैं।

अग्रवाल ने कहा, "इन नौकाओं से इन दोनों नदियों के रास्ते इस वर्ष 5.40 करोड़ टन लौह अयस्क की ढुलाई हुई। जबकि पिछले वर्ष 4.40 करोड़ टन लौह अयस्क की ढुलाई हुई थी। मुझे संदेह है कि इन नदियों के रास्ते और अधिक लौह अयस्क की ढुलाई की भी जा सकती है। इन जल मार्गो में अब और अधिक क्षमता नहीं बची है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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