युवाओं में थायराइड बढ़ने से आघात का खतरा
वाशिंगटन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। थायराइड की अधिकता से युवाओं में आघात का खतरा 44 फीसदी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को ज्यादा पसीना आना, वजन में कमी, दस्त और घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं।
हाल में हुए एक शोध के मुताबिक, जिन युवाओं में थायराइड का स्तर सामान्य होता है उनके मुकाबले अधिक थायराइड से पीड़ित युवाओं में आघात का खतरा 44 फीसदी ज्यादा रहता है।
ताइवान के कॉलेज ऑफ मेडिसिन इन ताइपे के स्कूल ऑफ हेल्थ केयर एडमिनिस्ट्रेशन के प्रोफेसर हेरंग-चिग लिन कहते हैं, "युवाओं में होने वाले कुल इस्कीमिक आघातों में से एक तिहाई से एक चौथाई तक के कारणों का पता ही नहीं चल पाता।"
इस्कीमिक आघात उस समय होता है जब दिमाग की धमनी अवरुद्ध हो जाती है। यदि धमनी अवरुद्ध हो जाती है तो दिमाग की कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) पर्याप्त ऊर्जा नहीं उत्पन्न कर पातीं। इसके बाद ये काम करना बंद कर देती हैं और मृत हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत इलाज निश्चित रूप से जटिल होता है।
लिन के अनुसार, "18 से 44 साल के आयु वर्ग में थायराइड की अधिकता से आघात होने के खतरे की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।"
लिन कहते हैं कि थायराइड की अधिकता से संबंधित विकारों से दुनिया भर में 0.5 फीसदी (200 लोगों में एक) से दो फीसदी (50 लोगों में एक) आबादी पीड़ित है। इसमें एक बड़ा हिस्सा युवाओं का भी है।
ऐसी स्थिति में शरीर में थायराइड हार्मोन ज्यादा उत्पन्न होने लगता है जिससे चयापचय की क्रियाएं तेज हो जाती हैं। नतीजतन ज्यादा पसीना आने, वजन में कमी, दस्त और घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं।
शोधकर्ताओं ने एक जनवरी 1998 से 31 दिसंबर 2001 के बीच थायराइड की अधिकता वाले 3,176 और थायराइड संबंधी रोगों से मुक्त 25,408 लोगों पर अध्ययन किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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