हरिद्वार महाकुंभ में तीसरा शाही स्नान

हरिद्वार महाकुंभ में तीसरा शाही स्नान

शालिनी जोशी

हरिद्वार से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा और हनुमान जयंती दोनों है इसलिए इस स्नान का महत्त्व और भी बढ़ गया है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 500 वर्षों के बाद ऐसा पुण्य संयोग बना है.

हर की पैड़ी पर मानो तिल रखने की भी जगह नहीं है. पुण्य और मोक्ष की कामना लिए आधी रात से ही श्रद्धालु ब्रह्मकुंड पर उमड़ने लगे.

बिहार के भागलपुर ज़िले से आए सीताकांत यादव कहते हैं, “यहां स्नान के बाद बार-बार जन्म नहीं लेना पड़ता और आदमी को 84 योनियों में नहीं भटकना पड़ता है, इसलिए मैं भी यहां आया हूं.”

पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर से आई 62 वर्षीय जयिता मित्रा आनंद विभोर हैं, “इस महापर्व में मैं भी स्नान करूं इसकी इच्छा बरसों से थी. आज साध पूरी हो गई, बहुत शांति मिल रही है.”

लाखों की तादाद में लोगों की भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला प्रबंधन और सुरक्षा बलों को अच्छी-खासी कसरत करनी पड़ रही है. सुबह ही एक व्यक्ति गंगा के तेज बहाव में बह गया. गोताखोरों ने उसे निकाल तो लिया लेकिन उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है.

आम लोग सुबह नौ बजे तक ही हर की पैड़ी पर स्नान कर सकेंगे उसके बाद यहां अखाड़ों का शाही स्नान शुरू हो रहा है जो रात 11 बजे तक चलेगा.

कितने शाही स्नान

हरिद्वार महाकुंभ में अब तक 3 शाही स्नान ही होते थे और इसके बाद बैरागी अखाड़े एक और स्नान करते थे. इसे शाही दर्जा नहीं मिला हुआ था, लेकिन इस बार बैरागी, उदासी और निर्मलों के छह अखाड़ों की मांग पर उनके स्नान को भी शाही स्नान घोषित किया गया है, लिहाजा चार शाही स्नान हो रहे हैं.

आज यही अखाड़े शाही सज-धज और भव्य जमात निकालकर स्नान कर रहे हैं जबकि संन्यासियों के अखाड़े, प्रतीक के तौर पर स्नान करेंगे. उनके स्नान में निशान, पालकी और आचार्य और महामंडलेश्वरों की शाही सवारी नहीं होगी.

अखाड़ों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास कहते हैं कि धर्म और संस्कृति की एकजुटता के लिए ये फ़ैसला किया गया है.

उनका कहना है, “अखाड़े ही कुंभ लगवाए हैं. सनातन परंपरा में कुंभ ही वो स्थल है जब देशभर के अखाड़े और छावनियां यहां जमा होते हैं. हमलोग इकट्ठा समीक्षा करते हैं. इसलिए हमारे बीच स्नान के रूप और क्रम को लेकर सहमति और सद्भाव होना ही चाहिए.”

अखाड़े एक तरह से हिंदू धर्म के रेजीमेंट माने जाते हैं. वैदिक धर्म के संरक्षण और प्रचार आदि के लिए शंकराचार्य ने अखाड़ों का गठन किया था. उद्देश्य ये था कि जो शास्त्र से न मानें उन्हें शस्त्र से मनाया जाए.

कालांतर में ये अखाड़ें आचार-विचार के आधार पर बंटते गए और आज कुल 13 अखाड़ें हैं जिनमें से सात संन्यासी अखाड़ें हैं जिनेके नागा साधु होते हैं और शेष छह वैष्णव और सिखों के अखाड़ें हैं.

पहली बार बैरागी और सिख अखाड़े भी शाही स्नान कर रहे हैं.

एक अनुमान के मुताबिक आज क़रीब 15 लाख लोग गंगा स्नान करेंगे. महाकुंभ का चौथा और आखिरी शाही स्नान 14 अप्रैल को होगा.

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