आंदोलनरत गूजर नेता बातचीत को तैयार

आंदोलनरत गूजर नेता बातचीत को तैयार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

राजस्थान में आंदोलनरत गूजर नेता शुक्रवार को राज्य सरकार से अपनी मांगों को लेकर बातचीत के लिए राजी हो गए हैं. गूजर समुदाय की ओर से पाँच सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल इस बाबत दोपहर बाद राजधानी जयपुर में सरकार के आला अधिकारियों से बातचीत करेगा. राज्य के मुख्य सचिव भी गूजर नेताओं से संपर्क में हैं और उन्होंने दोपहर बाद दोनों पक्षों की बातचीत की पुष्टि की है.

शुक्रवार को दोनों पक्षों की बातचीत के नतीजे पर गूजर समुदाय के राज्यव्यापी आंदोलन की दिशा तय होनी है. इस लिहाज से शुक्रवार की बातचीत को अहम माना जा रहा है. इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को गूजर आंदोलन के दौरान जन-धन की हिफ़ाजत के पुख्ता उपाय करने को कहा है.

गूजर नेताओं ने 23 मार्च से आरक्षण की अपनी मांग को लेकर फिर से आंदोलन शुरू कर दिया है. गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वे 26 मार्च को जयपुर कूच करेंगे मगर सरकार ने उन्हें गुरुवार को बातचीत का न्यौता भेजा जिसे गूजर नेताओं ने कबूल कर लिया.

बैंसला का विरोध

मगर ये पहला मौका है जब गूजर नेताओं के एक बड़े वर्ग ने बैंसला का विरोध शुरू कर दिया है. गुरुवार को गूजर समाज के लोगों ने जयपुर में शांति मार्च निकाला और आंदोलन के मौजूदा नेता, किरोड़ी सिंह बैंसला पर अपने राजनितिक हितों के लिए बिरादरी को इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया. इन नेताओ में न केवल सतारूढ़ कांग्रेस पार्टी के गूजर नेता हैं, बल्कि उस भाजपा के भी हैं जिसने हाल में बैंसला को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नामित किया है.

गुरूवार को इन गूजर नेताओं ने एक गूजर विधायक, रामस्वरूप कसना के नेतृत्व में एक शांति मार्च निकाला, अमन की बातें कीं और कहा कि समाज शांति चाहता है, अब हिंसा नहीं होनी चाहिए. हाथों में अमन का पैगाम लिखी तख्तियां थी और हर चेहरे पर चिंता का भाव भी. बैंसला के निकट सहयोगी डॉक्टर रूप सिंह बैंसला पर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताते है. उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप व्यक्तिगत रंजिश वश लगाए जा रहे हैं.

स्थिति को संभालें

इस बीच राज्य सरकार ने अखबारों में बड़े बड़े विज्ञापन देकर उन योजनाओं को जनता के सामने रखा है जो गूजर बिरादरी के कल्याण के लिए बनाई गई हैं. साथ ही आंदोलन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती क़दम भी उठाए जा रहे हैं. इसके तहत अजमेर और जयपुर में धारा 144 लागू कर दी गई है.

उधर हाईकोर्ट ने सरकार से उन उपायों का विवरण देने को कहा है जो प्रस्तावित गूजर आंदोलन के दौरान अमन चैन बनाए रखने के लिए किए गए हैं. हाईकोर्ट ने ये निर्देश तब दिए जब एक नागरिक ने गूजर आंदोलन के इतिहास का हवाला देकर अपनी चिंता न्यायालय के सामने रखी. सरकारी महाधिवक्ता ने हाई कोर्ट को सूचित किया कि सरकार पूरी तरह सजग है.

राजस्थान ने हाल के वर्षो में दो बड़े गूजर आंदोलन देखे हैं. इनमें कोई 70 लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया इसीलिए आंदोलन की फिर दस्तक सुनाई देते ही लोग चिंतित होने लगे हैं.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+