पाकिस्तान ने कश्मीर का राग अलापा (लीड-2)

वाशिंगटन, 24 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बुधवार को यहां पहली रणनीतिक बातचीत शुरू हो गई। इस दौरान अमेरिका ने जहां आतंकवाद के खिलाफ युद्ध पर जोर दिया, वहीं इस्लामाबाद ने कश्मीर मुद्दे पर राग अलापा और भारत जैसे असैन्य परमाणु समझौते का अमेरिका से आग्रह किया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, "पाकिस्तान कश्मीर सहित दक्षिण एशिया में सभी मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।" इसके साथ ही कुरैशी ने अमेरिका से आग्रह किया कि भारत के साथ कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान में वह रचनात्मक भूमिका निभाए।

कुरैशी ने कहा, "हमें आशा है कि अमेरिका इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी रचनात्मक भूमिका बनाए रखेगा।"

कुरैशी ने ऊर्जा तक भेदभाव रहित पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए भी अमेरिका से कहा। इसका सीधा मतलब यह होता है कि पाकिस्तान अमेरिका से उस तरह का परमाणु सहयोग चाहता है, जिस तरह का परमाणु सहयोग समझौता भारत-अमेरिका के बीच हुआ है।

आतंकवाद और चरमवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान के महत्व को रेखांकित करते हुए कुरैशी ने अमेरिका के साथ ऊर्जा सहित सभी तरह के मुद्दों पर साझेदारी बढ़ाने की वकालत की।

इसके पहले बातचीत की शुरुआत करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने दक्षिण एशिया में शांति स्थापना में पाकिस्तान की भूमिका की प्रशंसा की और पाकिस्तान की सुरक्षा को एक शीर्ष प्राथमिकता बताया।

पाकिस्तान के आतंक निरोधी अभियानों का जिक्र करते हुए क्लिंटन ने पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया। कहा, "पाकिस्तान का संघर्ष हमारा अपना संघर्ष है।"

क्लिंटन ने हालांकि स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच अतीत में गलतफमियां और असहमतियां रही हैं।

क्लिंटन ने कहा, "यह भी तय है कि भविष्य में और असहमतियां होंगी, जैसा कि मित्रों या पारिवारिक सदस्यों के बीच असहमतियां होती हैं।"

क्लिंटन ने कहा, "लेकिन यह एक नया समय है। बीते वर्षो के लिए ओबामा प्रशासन ने एक अलग दृष्टिकोण अपनाया है।"

क्लिंटन ने कहा कि संबंधों को सुधारने का एक रास्ता यह होगा कि ऊर्जा विकास, शिक्षा और कृषि को शामिल करने के लिए सुरक्षा पर जोर दिया जाए। इस पर कुरैशी ने कहा कि हिंसक चरमवाद पर जारी युद्ध को जीतने के लिए ये सभी समस्याएं हर हाल में दूर की जानी चाहिए।

बहरहाल, न तो क्लिंटन ने किसी खास कार्यक्रम की रूपरेखा सामने रखी और न कुरैशी ने ही, लेकिन मीडिया खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तान मांगों की एक लंबी सूची बातचीत के दौरान सामने रखने जा रहा है। इसमें भारत जैसा असैन्य परमाणु समझौता और नई दिल्ली के साथ शांति प्रक्रिया की बहाली में वाशिंगटन की प्रत्यक्ष भूमिका की मांग शामिल है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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