अमेरिका का सुरक्षा पर और पाकिस्तान का परमाणु सौदे पर जोर (लीड-1)
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 24 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बुधवार को यहां पहली रणनीतिक बातचीत शुरू हो गई। इस दौरान अमेरिका ने जहां आतंकवाद के खिलाफ युद्ध पर जोर दिया तो वहीं इस्लामाबाद ने अपनी मांगों की एक लंबी सूची अमेरिका के सामने रख दी, जिसमें भारत जैसा असैन्य परमाणु समझौता और भारत के साथ शांति वार्ता की बहाली में मदद करने जैसी मांगें शामिल हैं।
बातचीत शुरू करते हुए क्लिंटन ने दक्षिण एशिया में शांति स्थापना में पाकिस्तान की भूमिका की प्रशंसा की और पाकिस्तान की सुरक्षा को एक शीर्ष प्राथमिकता बताया।
पाकिस्तान के आतंक निरोधी अभियानों का जिक्र करते हुए क्लिंटन ने पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया। कहा, "पाकिस्तान का संघर्ष हमारा अपना संघर्ष है।"
क्लिंटन ने हालांकि स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच अतीत में गलतफमियां और असहमतियां रही हैं।
क्लिंटन ने कहा, "यह भी तय है कि भविष्य में और असहमतियां होंगी, जैसा कि मित्रों या पारिवारिक सदस्यों के बीच असहमतियां होती हैं।"
क्लिंटन ने कहा, "लेकिन यह एक नया समय है। बीते वर्षो के लिए ओबामा प्रशासन ने एक अलग दृष्टिकोण अपनाया है।"
क्लिंटन ने कहा कि संबंधों को सुधारने का एक रास्ता यह होगा कि ऊर्जा विकास, शिक्षा और कृषि को शामिल करने के लिए सुरक्षा पर जोर दिया जाए। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि हिंसक चरमवाद पर जारी युद्ध को जीतने के लिए ये सभी समस्याएं हर हाल में दूर की जानी चाहिए।
न तो क्लिंटन ने किसी खास कार्यक्रम की रूपरेखा सामने रखी और न कुरैशी ने ही, लेकिन मीडिया खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तान मांगों की एक लंबी सूची बातचीत के दौरान सामने रखने जा रहा है। इसमें भारत जैसा असैन्य परमाणु समझौता और नई दिल्ली के साथ शांति प्रक्रिया की बहाली में वाशिंगटन की प्रत्यक्ष भूमिका की मांग शामिल है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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