इच्छाधारी संत को 20 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेजा गया

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. के. सरवरिया ने द्विवेदी (39) को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। जांचकर्ताओं ने मामले से जुड़े दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए और पुलिस हिरासत की मांग की।

पुलिस ने द्विवेदी को 26 फरवरी को दक्षिण दिल्ली से छह महिलाओं और एक पुरुष के साथ गिरफ्तार किया था।

द्विवेदी पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की धाराएं लगाई गई हैं। न्यायिक हिरासत की अवधि मंगलवार को समाप्त होने के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया था।

मकोका कानून के तहत आरोपी अपनी गिरफ्तारी के दिन से लेकर छह माह तक जमानत के लिए अपील नहीं कर सकता है। इस कानून के तहत उपायुक्त स्तर का पुलिस अधिकारी ही आरोपी का बयान दर्ज कर सकता है जिसे अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है।

द्विवेदी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के चित्रकूट का रहने वाला है। वह वर्ष 1988 में दिल्ली आया और शुरुआत में उसने सेक्यूरिटी गार्ड की नौकरी की। सेक्स रैकेट के आरोप में वह इससे पहले 1997 और 1998 में भी गिरफ्तार हुआ था।

इसके बाद उसने अपना रूप बदल लिया और खुद को इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूट वाले कहने लगा। इसके बाद धर्म की आड़ में उसने सेक्स रैकेट शुरू कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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