मून ने किया आईपीसीसी का बचाव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने जलवायु परिवर्तन पर बने अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) की रिपोर्ट की आलोचना के बीच इससे जुड़े वैज्ञानिकों का बचाव किया है.
बान की मून ने न्यूयॉर्क में कहा, आईपीसीसी की रिपोर्ट की कोई भी आलोचना इस निष्कर्ष को ख़ारिज नहीं करता है कि मनुष्यों की गतिविधियों के कारण जलवायु पर बुरा असर पड़ा."
उनका कहना था, "ऐसे स्थिति में कार्बन उत्सर्जन में कटौती तत्काल होनी चाहिए."
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आईपीसीसी की रिपोर्ट के नतीजों और कार्यप्रणालियों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए.
मून के अनुसार जलवायु परिवर्तन से जुड़े वैज्ञानिकों को यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि वो क्या जानते हैं और क्या-क्या अनिश्चित या संदेहयुक्त है.
इससे पहले भी बान की मून ने कहा था कि आईपीसीसी के काम की समीक्षा होनी चाहिए.
उनका ये भी कहना था कि समीक्षा का काम इंटर एकेडेमी काउंसिल के समन्वय से हो और इसमें दुनिया की प्रतिष्ठित संस्थाएँ भी जुड़ें.
आईपीसीसी ने 2007 में जलवायु परिवर्तन की स्थिति पर एक बड़ी रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि हिमालय के ग्लेशियर वर्ष 2035 तक पिघल जाएँगे. रिपोर्ट की इन ख़ामियों को आईपीसीसी ने भी स्वीकार किया है.
इंटर एकेडेमी काउंसिल का कहना है कि वो जल्दी ही समीक्षा के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल बनाएगा.
काउंसिल के को-चेयर रॉबर्ट जकग्राफ भी स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी नहीं होगी और बिल्कुल स्वतंत्र होगी.
उन्होंने बताया कि पैनल में ऐसे वैज्ञानिक होंगे जो आईपीसीसी के कार्य करने के ढंग और उससे इतर हो रहे शोधों की भी अच्छी जानकारी रखते हों.
पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के दौरान दुनिया भर की सरकारों ने आईपीसीसी के काम की समीक्षा किए जाने की मांग की थी.












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