काबुल हमले से भारत अविचलित, मेनन ने की सुरक्षा समीक्षा (लीड-2)

मेनन ने काबुल में भारतीय राजदूत जयंत प्रसाद से मुलाकात की और पुनर्निर्माण की गतिविधियों में लगे भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की।

काबुल में 26 फरवरी को हुए हमले के बाद काबुल का दौरा करने वाले मेनन पहले शीर्ष भारतीय अधिकारी हैं। हमले में सात भारतीय मारे गए थे।

मेनन का काबुल दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब अफगानिस्तानी खुफिया एजेंसी ने पाया है कि हमले में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था। इसी संगठन ने मुंबई हमले की भी साजिश रची थी।

मेनन अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, विदेश मंत्री जलमइ रसूल और अन्य अफगानी नेताओं से मुलाकात करेंगे और हाल के हमले के बारे में उनसे चर्चा करेंगे।

इधर, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि 26 फरवरी का काबुल हमला अफगानिस्तान की मदद में लगे भारतीय लोगों के उत्साह को नहीं तोड़ पाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बगैर किसी बाहरी हस्तक्षेप के अफगानिस्तान के भाग्य को संवारने का संकल्प लिया।

प्रधानमंत्री ने संसद में कहा, "हम इस कायरतापूर्ण हमले की निंदा करते हैं। मैं संसद को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस प्रकार के हमले से अफगानिस्तान में मदद कर रहा भारत नहीं रुकेगा।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि गत सप्ताह अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने उनसे टेलीफोन पर बात की थी और उन्हें आश्वस्त किया था कि वहां भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा, "मैंने भी करजई को आश्वस्त कि भारत उन्हें सभी जरूरी सहायता करेगा।"

उल्लेखनीय है कि गत 26 फरवरी को काबुल में एक गेस्ट हाउस को निशाना बनाकर आतंकवादी हमला किया गया था, जिसमें दो भारतीय सैन्य अधिकारी सहित सात लोग मारे गए थे।

दूसरी ओर अपने बयान पर नई दिल्ली की नाराजगी की खबरों को मीडिया में देखने के बाद अफगानिस्तान व पाकिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने शुक्रवार को अपने उस बयान पर खेद जताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 26 फरवरी को काबुल में हुए हमले में भारतीयों को निशाना नहीं बनाया गया था। हॉलब्रुक ने अफगानिस्तान में भारत की मानवीय और पुनर्निर्माण सहायता की प्रशंसा की।

हॉलब्रुक ने वाशिंगटन में कहा, "मैंने यह नहीं कहा था कि भारतीय निशाने पर नहीं थे, बल्कि मैंने यह कहा था कि शुरू में ऐसा लगा था कि कोई आधिकारिक भारतीय सुविधा केंद्र निशाने पर नहीं था।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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